धराशायी होती भूमिहार अस्मिता, बाबू अंबुज शर्मा की कविता

कलिकाल लाल कराल भाल पर महाकाल ताण्डव कर रहे लड लड के भिडकर संग मे भूमिहार संकट  सह रहे नर नारी धेनू वाहन निशि दिन यादवा-आतंक की बलि चढ...
inter-caste marriages

वैवाहिक विवाद और भूमिहार समाज के संगठनों की मजबूरियां

दो पीढ़ियों का टकराव - बच्चा जबतक छोटा है तभी तक वह आपके साथ, आपके लिए, आपके पदचिन्हों पर, आपके बताये संस्कारों को लेकर...
Rajeev Kumar

राजनीतिक महत्वकांक्षा के लिए भूमिहार ब्राह्मण समाज को पथभ्रष्ट करने की साज़िश

एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा विगत तीन दशकों से भूमिहार ब्राम्हण समाज को पथभ्रष्ट कर उसको बर्बादी की आग में झोंकने पर लगातार अमादा...
Blog 02

भूमंत्र यानि भूमिहारों के लिए संजीवनी – ‘राजीव कुमार’

भूमिहार ब्राम्हणों के भारत के सबसे बड़े सामाजिक मंच भूमंत्र ग्रुप की दिन-ब -दिन बढ़ती उपयोगिता एवं विश्वसनीयता तथा इस मंच पर मौजूद भूमिहार...
bhartiya musalman se sawal

भारतीय मुसलमानों के मन को समझने के लिए एक काफ़िर के 11 सवाल

भारत के मुसलमानों के मन को समझने के लिए हम काफ़िरों को निम्न सवालों के उत्तर खोजने की कोशिश करनी चाहिए: 1. कश्मीर से हिंदुओं...
bhumihar brahaman

‘हनुमान’ जी की तरह अपनी शक्तियां क्या भूल गया ‘भूमिहार ब्राहमण समाज’?

कभी नौकर-चाकर रखने वाले भूमिहार ब्राहमण आज खुद नौकरी के लिये तरस रहे है समय बदलता रहा है. सबल-निर्बल हो जाता है और निर्बल-सबल. पिछले...
Bhumihar Politics

आपसी टाँग-खिचौवल से दूर होकर बेहतरी के लिये काम करे समाज: संजय चौधरी

आज भी हम भूमिहार -ब्राह्मण सभी क्षेत्रों में अग्रणी है। उद्योग, व्यवसाय,शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बौद्धिक क्षमता आदि सभी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका में आज...
bhumihar ko prathmikta abhinav kumar

भूमिहार समाज को आगे बढ़ाना है तो भूमिहारत्व को प्राथमिकता देनी होगी

समाज के लोगों में इतनी दुविधा क्यों है ? कभी वो कट्टर राष्ट्रभक्त बन जाते है कभी धर्मरक्षक के रूप में सामने आने लगते...
An emotional, thought-provoking illustration showing the decline of ancestral land ownership among Bhumihar families. In the foreground, an elder Bhumihar farmer with wrinkled face and white dhoti holds a handful of soil slipping through his fingers, symbolizing the loss of land. Behind him, ancestral farmland is fragmented—one side lush and green with crops and traditional houses, the other side replaced by modern luxury cars, mansions, and shopping malls. In the background, young family members are shown pressuring for wealth and luxury, while land deeds are exchanged with outsiders, hinting at changing village social dynamics. The overall tone should be symbolic, realistic yet artistic, with warm earthy colors fading into a grayish future, conveying loss of identity, broken legacy, and concern for the next generation.

भूमिहीन होते भूमिहार ब्राहमण परिवार और मार्ग से भटकती युवा पीढ़ी!

एक सामान्य आकलन के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि लगभग 2-5% भूमिहार परिवार भूमिहीन हो चुके हैं. लगभग 10-15% भूमिहार परिवारों के...

सवर्णों की मदद के बिना दलितों का उद्धार कतई नहीं होता

अरविंद रॉय -ब्राह्मण और समाज सुधार :भीमा कोरेगांव से कुछ लोग अपनी पॉलिटिक्स की दुकान चमकाने के लिए मूर्खता के सबसे निम्न स्तर पर...