Category Archives: bhumantra

Dr Arun Kumar

बड़ी खबर : नवादा से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे डॉ. अरुण कुमार, 25 मार्च को भरेंगे नॉमिनेशन

Breaking News : सियासत के गलियारे से एक बड़ी खबर आ रही है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जहानाबाद के वर्तमान सांसद डॉ. अरुण कुमार अबकी नवादा से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। लेकिन वे निर्दलीय लड़ेंगे या महागठबंधन के किसी दल की तरफ से इस पर अभी सस्पेंस बरकरार है।

गौरतलब है कि नवादा सीट पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में छाया हुआ। यहां के वर्तमान सांसद भाजपा के गिरिराज सिंह है। उन्हें इस बार नवादा की बजाए बेगूसराय का टिकट दिया गया है। इससे वे नाराज चल रहे हैं। ये सीट इस बार लोजपा के खाते में गयी है।

Upnayan Sanskaar

ब्रह्मर्षि परिषद् के तत्वावधान में समस्तीपुर जिले में विराट भुमिहार ब्राह्मण उपनयन संस्कार

ब्रह्मर्षि परिषद् के तत्वावधान में समस्तीपुर जिले में पुर्वनियोजित वार्षिक विराट भुमिहार ब्राह्मण उपनयन संस्कार समारोह २०१९ का आयोजन सुनिश्चित है.

स्थान: ग्राम: हजपुरवा, प्रखंड: वारिसनगर, जिला: समस्तीपुर, बिहार.
दिनांक: १७ अप्रैल २०१९.

संपर्क: 7033332828

आप सभी परशुराम के उपासकों से अनुरोध है कि इस समारोह में अपनी यथासंभव सहभागिता सुनिश्चित करें.

कृपया इस अनुरोध को अधिक से अधिक ब्रह्मर्षि भाईयों तक पहुँचाने की कृपा करें ताकि अधिक से अधिक बरुआ को इस उपनयन संस्कार समारोह का लाभ मिले.

जय परशुराम.

ब्रह्मर्षि परिषद् समस्तीपुर

Bhumihar Politics

राजनितिक गलियारे में एक खनक पैदा करना होगा

-मुकेश कुमार चुन्नू

ढेर  जोगी मठ उजाड़, जी हां भूमिहार राजनीती के लिए ये बात अक्षरसः सही है। क्या छोटा क्या बड़ा कोई किसी से कम नहीं,  हरेक की चाहत है विधायक-सांसद  बनना । हरेक पार्टी में कई गुट है  और ख़ुद स्थापित करने के क्रम में एक दूसरे को नीचा दिखाना जैसे हमारा कर्तव्य हो गया है।

Mukesh Kumar
मुकेश कुमार चुन्नू

आज अपने को हम अपने को राजनितिक पीड़ित कह रहे है । भाजपा से लेकर किसी भी पार्टी में हम अपना उचित अधिकार नहीं प्राप्त कर रहे है । इसका कारण यह है कि हम किसी को अपना सर्वमान्य नेता कहाँ मानते  है। भाजपा के अंदर ही जितने भूमिहार नेता है क्या उनका अपना लॉबिंग नहीं  है क्या ? क्या वो सभी केवल अपने सीट के जुगाड़ के आलवा कोई और काम नहीं करते। ताजा मामला गिरिराज दा  का है  इनके  साथ जो कुछ हो रहा है उसके पीछे पार्टी के अंदर के भूमिहार  नेता क्या कर रहें है ?

गिरिराज दा भी इसके लिये कम जिम्मेवार थोड़े है कभी भी अपने आप को भूमिहार नेता बतौर  अपने को स्थापित करना नहीं चाहा,  हिन्दुत्वाद को  ही अपनी  पकड़ बनाई है । लकिन आज जब उनके साथ अन्याय  हो रहा है तब कोई हिंदुत्वादी लोग खुलकर सामने नहीं आ रहे  । जो कुछ चिल्ला रहे है सोशल मीडिया पर वो कुछ भूमिहार के  गैर-राजनीतिक संग़ठन ।

इन राजनितिक संग़ठन  पर क्या कहे किसी विशेष के बुराई मैं नहीं करना चाहता परन्तु एक सत्यता जो मुझे खाये जा रही है रोज नित्य एक संग़ठन का बनना क्या दिखा रहे है अपने आप को इस तरह आप राजनितिक वर्चस्व हासिल कर पायंगे कदापि नहीं। राजनिति के शीर्ष पर  बैठा हुआ व्यक्ति आपकी हर गतिविधियों को वाच करता है उसके अंदर कोई संवेदना नहीं होती केवल एक ही नब्ज़ को पहचानता है वोट बैंक, अगर वोट बैंक  आपके साथ  है तो ही आपको तरजीह देगा अन्यथा आप से दूरी बना लेगा ।

आज वही हो रहा है आप हरेक जगह गुटबाजी तथा अपने से ज्यादा किसी दूसरे को तरजीह न् देकर स्वयं को स्वयंभू नेता बना चुके है  आपकी हालात बद से बदतर होती चली जायेगी कोई रोक नहीं सकता ।

आज होली का दिन है सभी को आपस में कटुता को त्यागने का समय है लोकसभा चुनाव के मद्यनजर रखते हुये भूमिहार-ब्राह्मण जाति आधारित जितने भी स्वयंभू संग़ठन है उनसे मैं एक बार अपील करना चाहूंगा एक मंच में आये आपसी कटुता को त्याग करें आप के बीच से बहुमत के हिसाब  से नेता का चुनाव हो जाय उसके बाद आप उसे नेता मान ले और एक स्वर भूमिहार समाज को एक वोटबैंक के रूप में परिणत कीजिये।  राजनितिक गलियारे में एक खनक पैदा करना होगा जीते मैं मुड़ा सत्ता मेरी होगी और मै राज करूँगा ।

सभी को होली मुबारक

 

Bhumihar Politics

राजनैतिक कहार की भूमिका निभा रहा भूमिहार

-ब्रहमर्शी चिंतक 

कहार शब्द का नाम लेते ही समाज के उन लोगों की याद आती है जो लोग दूल्हा-दुल्हन की डोली उठाते थे और उस डोली को अपने कंधे पर उठाकर दुल्हन के घर से दूल्हे के घर तक पहुंचाते थे ।
देखने में यह जितना ख़ुशी से भरा कार्य लगता था वास्तव में उतना ही कठिन और परिश्रम का कार्य था जिसमें उत्तरदायित्वों का भी अदृश्य लेकिन अपार बोझ था ।

Rajeev Kumar
Rajeev Kumar

आज भूमिहार समाज की भूमिका एक राजनैतिक कहार की हो चुकी है जो अमूमन हर राजनैतिक पार्टियों में झण्डाबरदारी करते नजर आ रहे हैं । सभी पार्टियों के झंडा ढोने के बावजूद इस समाज की न तो सूरत बदल रही है और न ही इसकी सीरत । क्या हैं इसके कारण आइये इसका फिर से अध्ययन करते हैं ।
मूल रूप से कृषि पर निर्भर भूमिहार समाज शुरू से ग्रामीण राजनीति एवं अर्थव्यवस्था का सिरमौर रहा है । देश की आज़ादी में अनेकों पढ़े लिखे विद्वान एवं क्रांतिकारियों की कुर्बानी ने सदैव भूमिहार को अन्य जातियों के बीच एक आदर्श जाति के रूप में अग्रणी रखा और जब देश आज़ाद हुआ तो समाजसेवा रुपी लोकतान्त्रिक व्यवस्था के सफल संचालन हेतु बिहार का प्रथम मुख्यमंत्री भी भूमिहार समाज के डॉक्टर श्री कृष्ण सिंह को बनाया गया ।
श्री कृष्ण सिंह के नेतृत्व में बिहार में सर्वाधिक तरक्की हुई और बहुत सारे उद्द्योग लगे जिसमें पढ़े लिखे लोगों को रोजगार मिला ।
श्री कृष्ण सिंह के अद्भुत नेतृत्व के माध्यम से भूमिहार समाज ने अन्य जाति विशेष में अपनी राजनैतिक नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया और समस्त बिहारवासियों के समक्ष भूमिहारों की गुणवत्तापूर्ण राजनैतिक क्षमता का प्रतिमान भी स्थापित किया ।
लेकिन 1990 के उपरान्त मंडल की राजनीति के आगमन से हुए उथल पुथल में भूमिहार समाज सर्वाधिक प्रभावित हुआ और अपनी प्रमाणित राजनैतिक क्षमता के सदुपयोग से वंचित हो गया या यूँ कहें कि कुछ छलिया प्रवृति के लोगों के छद्म का शिकार होकर हासिए पर चला गया ।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुखद है कि सबसे अधिक प्रमाणित राजनैतिक प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता रखने के बावजूद भूमिहार समाज को आज सभी पार्टियों में राजनैतिक कहार की भूमिका में देखा जाता है ।
सचमुच इतना प्रतिभासम्पन्न और सुसभ्य तथा शांति एवं न्याय प्रिय भूमिहार समाज आज राजनैतिक कहारी कर रहा है जबकि इस समाज को आज आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए ।
इस राजनैतिक कहारी करने की विवशता या उसके कारण पर जब हम गंभीर नज़र डालते हैं तो जो सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कारक उभरकर सामने आ रहा है वह है अच्छे और विद्वान तथा सच्चे सामाजिक चरित्र वाले भूमिहार समाजसेवियों का राजनीति में सख्त अभाव । जबतक पढ़े लिखे योग्य एवं समर्पित युवा तथा बुद्धिजीवी आगे बढ़कर भूमिहार समाज की राजनीति की बागडोर नहीं थामेंगे तबतक भूमिहार समाज की राजनैतिक कहारी ख़त्म नहीं होने वाली है । आज जिधर भी देखिये उधर अधिकतर दलाल एवं अपराधी प्रवृति के लोग ही भूमिहार समाज की राजनीति की बागडोर अपने हाथों में लिए हुए हैं और ये छलिया लोग ( रावण ) ही समस्त भूमिहार समाज को राजनैतिक कहार बनाकर रख दिए हैं ।
इन आपराधिक व दलाल प्रवृति के लोगों ने अपने आपराधिक व भ्रष्टाचारी कृत्य से खुद को बचाने के लिए दूसरे समाज के समान विचारधारा वाले राजनैतिक लोगों से साझा एजेंडा के तहत गुपचुप समझौता कर रखा है और अपने निजी हित साधने हेतु लगातार अपने ही समाज को पतन की ओर धकेलने का निरन्तर कुचक्र भी रच रहे हैं ।
जबतक इन आपराधिक एवं भ्रष्ट लोगों के राजनैतिक प्रवेश पर पूर्ण विराम नहीं लगाया जाता तबतक भूमिहार समाज का पुनरूत्थान संभव नहीं ।
आइये सारे भूमिहार युवा एवं बुद्धिजीवी यह शपथ लें कि हम सब मिलकर इस राजनैतिक कहार की छवि से पूरे भूमिहार समाज को बाहर निकालेंगे एवं इसके लिए योग्य एवं समाज के प्रति समर्पित पढ़े लिखे विद्वान व सच्चे सामाजिक पुरोधा लोगों को आगे लाकर उनको अपना राजनैतिक समर्थन देकर विजयी बनाएँगे एवं इसप्रकार फिर से भूमिहारों की वो पुरानी गौरवशाली स्वस्थ एवं सामाजिक राजनीति का सूत्रपात करेंगे जिससे हमारा देश एवं राज्य तेजी से तरक्की कर सके ।

Bhumihar Leaders

एक समाज एक आवाज का नारा हो बुलंद

-अखिलेश कुमार 

जिस समाज का पूर्वकालिक इतिहास राष्ट्र प्रेम, समाज प्रेम रहा हो, जिस समाज ने चाणक्य जैसे गुरु और मार्गदर्शक भारत भूमि को दिया हो  जिन्होंने सम्पूर्ण जीवन भारत के अखण्डिता के लिए समर्पित कर दिया हो, जिस परशुराम समाज को रामधारी सिंह “दिनकर”, डॉ श्री कृष्णा सिंह, सहजानंद सरस्वती जैसे अनेको पुष्प से सुशोभित होने का सौभाग्य प्राप्त हो, जिन्होंने अपने राष्ट्र प्रेम की धमक से पुरे देश को गौरवान्वित किया हो, आज वह  समाज अपनी रानजीतिक अस्तित्व बचाने  में लगा हुआ है। ये अत्यंत ही दुखद बात है। आज देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के साथ-साथ दूसरी भी पार्टी इस समृद्ध समाज को उसका उचित भागीदारी  देने को तैयार नहीं है। आज़ादी के इतने बर्षो के बाद भी ऐसा समाज अपनी राजनीतिक धुरी बचाने और ढूंढ़ने में लगा हुआ है। इसके अनेको कारण हैं जिसप पर  चर्चा समाज को करना होगा और एक मुख्य धारा में आ अपनी राजनैतिक और सामाजिक हैसियत बतानी होगी । हमारे समाज के पूजनीय मुखिया जी जैसे ही हमारे समाज की स्मिता की रक्षा की आज जरुरत है।  ज़रूरत है  डॉ श्री कृष्णा सिंह जैसे समाज की लिए समर्पित व्यक्ति की जो समाज को राजनीतिक दृष्टिकोण से मजबूत करे।

देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बोलती है वो देश भक्त की पार्टी है। सिर्फ देश भक्त को टिकट देती है। वो नेशन फर्स्ट पे काम करती है। फिर तो आपके समाज को एक टिकट दे वो आपके देश भक्ति पे सवाल उठा रहा है। कही ना कही  हमें इनसे ये प्रश्न पूछना ही होगा और इनको ये बताना होगा की आज आप जो देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दंभ भर रहे है। उसमे इस समाज का अथक योगदान है। ये समाज आपके साथ तब से है जब आप सदन में 2-3 सदस्यों वाली पार्टी थे। इस परशुराम वंश के अनेको विभूति ने इस दल को अपनी मेंहनत और अपनी कार्यशैली से सिंचित कर आज आपको देश की सबसे बड़ी पार्टी बनायीं है।
आज जरुरत है “एक समाज एक आवाज” की नारा को बुलंद करने की । आज जरूरत है अपने समाज के नेताओ को आत्ममंथन करने की, समाज की लिए समर्पण भाव से काम करने की। जरुरत है समाज के युवाओ को सम्पूर्ण समाज को साथ ले कर समाज को नेतृत्व करने की।

“एक समाज एक आवाज” की नारा बुलंद करें और अभी से 2020 और 2024 की तैयारी में लग जाए। 2019 की इलेक्शन में समाज निर्माण नहीं तो एक ससक्त राष्ट्र निर्माण की लिए वोट करें और साथ में आज जरुरत है देश की सबसे बड़ी राजनीतिक दल को ये संदेश देने की की आप इस समाज के साथ नहीं देंगे तो यह समाज भी दूसरा बिकल्प ढूंढ़ने को तैयार है। इसलिये ही समाज के नेता आप चाहे जिस भी राजनीतिक दल में हो समाज के मुद्दों पर सब एक आवाज़ बनिये  यह आपके लिए भी करो या मरो वाली स्थिति है । समाज भी आज आपलोग के हरेक क्रिया को बहुत ग़ौर से देख रहा है और आपके साथ खड़ा है ।

जय परशुराम !! जय भूमिहार-ब्राह्मण समाज

Bhumihar Politics

भूमिहारों की अस्मिता पर खुली चोट, राजनीतिक पार्टियों का विकल्प तैयार करे समाज

-आशुतोष शर्मा 

संसदीय चुनाव से लेकर विधानसभा की अब तक की सभी चुनाव में बिहार का भूमिहार-ब्राह्मण अग्रगण्य रहा हालांकि 1990 के बाद जानबूझकर बिहार की राजनीतिक वजूद कम करने का प्रयास किया जाता है परंतु फिर भी बिहार का भूमिहार -ब्राह्मण राष्ट्रीय केंद्र बिंदु मानकर जातीयता से ऊपर उठकर मतदान करता रहा। आज भूमिहारों की यही राष्ट्रवादी सोच इसे  निर्मूल करने पर उतारू है। भूमिहार-ब्राह्मण कभी सामंतवादी  नहीं रहे परंतु स्वाभिमानी हमेशा से जरूर रहे। वर्षों तक बिहार के भूमिहार-ब्राह्मण  इस मुगालते में रहे की सरकार हम बनाते हैं अस्तित्व की लड़ाई हम लड़ते हैं ,परंतु इस  लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन और नेताओं के विचार ने इन्हें धरातल पर ले आया। बिहार के लाइमलाइट में आए नए अगड़ी जाति ने एकमात्र नरसंघार के बाद अपने आप को नतमस्तक कर विभिन्न राजनीतिक दलों में शरण ली ,परंतु बेचारा भूमिहार सैकड़ो नरसंहार का का पीड़ित, सैकड़ों समाज की विधवाओं का करुण क्रंदन सुनने के बाद भी स्वाभिमान सम्मान वश नही झुका और विपरीत शासन  में भी अपने बहनों एवं बेटियों को सिंदूर का कर्ज उतारा जिसका परिणाम समाज के सभी वर्गों को शांतिप्रसाद के रूप में प्रदान हुआ।

Ashutosh Sharma
Ashutosh

बहुत दुखद अनुभूति हुआ जब इस जाति  को जानबूझकर राजनीतिक परिदृश्य से गायब करने का षड्यंत्र किया गया  और ऐसे एक पक्ष  को जो अपने दम पर एक वोट भी भाजपा को नहीं दिला सकता। नेता प्रतिपक्ष जिसका अपना कोई राजनीतिक वजूद नहीं भाजपा की उम्मीदवारी तय करने को दिया गया है  जिसमें बिहार के शीर्ष नेतृत्व को(c.p thakur) को  गौण करना भी शामिल है । गिरिराज सिंह का नवादा से टिकट काटकर बेगूसराय भेजा जाना भी इसी की एक कड़ी है । विरोध के स्वर  निकलते हैं  तो कहता है भूमिहारो के पास कोई विकल्प नहीं है यह तो भूमिहार की अस्मिता पर खुली चोट है। सबसे बड़ी बात की पार्टी के आलाकमान जिन्हें पल पल की गतिविधीयों की ख़बर रहती है इस पर मौन साधे बैठी है ।
क्या सचमुच बिहार के भूमिहारों के पास कोई विकल्प नहीं? यदि हां तों इस अवसर पर भूमिहारो को यह बता देना चाहिए कि विकल्प है या नहीं है। भूमिहार सदैव अपने पुरुषार्थ पर जीता आया है आगे भी उसी पुरुषार्थ पर भरोसा कर निर्णय लेना चाहिए। नतमस्तक होने से अच्छा अपने आप को सामूहिक रूप से गंगा में विसर्जित कर देना अच्छा होगा, इस  राजनीतिक  ज़िल्लत से ।

निर्णय करें!

आपका अपना
आशुतोष शर्मा उर्फ़ (सोनू पांडे)
श्री कृष्ण नगर, औरंगाबाद

NDA

बिहार में एनडीए की टिकटों की बंदरबांट हो गयी, गिरिराज सिंह को बेगूसराय की चौकीदारी जबरन मिलना तय

- भूमंत्र डेस्क

आज एनडीए की प्रेस-कांफ्रेंस के बाद बिहार में पार्टीवार सीटों का आधिकारिक एलान हो गया। इसके तहत भाजपा और जदयू 17-17 सीटों से लड़ेगी जबकि लोजपा को 6 सीटें मिली है जिसमें नवादा की सीट भी शामिल है। इससे तय है कि गिरिराज सिंह को बेगूसराय भेजा जाएगा जहां उन्हें युवा नेता कन्हैया कुमार की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। देखिए पूरी लिस्ट –

NDA 2019NDA3

Gate Exam

गेट (GATE) परीक्षा में दिवाकर कुमार का जलवा, ऑल इंडिया में 16वीं रैंकिंग

 

दिल्ली। प्रतिष्ठित गेट (GATE) परीक्षा में दिवाकर कुमार ने 16वीं रैंकिंग लाकर अपने राज्य और समाज का नाम रौशन किया है। भूमंत्र की तरफ से उन्हें बहुत बधाई।

गौरतलब है कि गेट परीक्षा (Gate 2019 Exam) आईआईटी मद्रास द्वारा आयोजित की गई थी। ग्रेजुएट एप्टीटियूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग एक आल इंडिया एग्जाम है, जो इंजीनियरिंग के सभी विषयों के लिए होता है। गेट की परीक्षा कम्प्यूटर बेस्ड होती है। इस परीक्षा के माध्यम से स्टूडेंट्स को आईआईटी जैसे संस्थानों में एडमिशन मिलता है।

उनकी इस उपलब्धि पर उनके बड़े भाई मधुसूदन देव अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखते हैं –

My younger brother got All India ranking 16 in Gate2019. Now he is eligible for admission in top IITs of India.

Diwakar 1

Kanhaiya

कन्हैया की वकालत करने वाले सेकुलरिज्म की पाठशाला के विद्यार्थी तो नहीं !

– राम भवन शर्मा

अभी कल से देख रहा हूं भू समाज के लोग तरह-तरह की बातें करते नजर आ रहें हैं! एक सीट भाजपा दिया,आधा सीट भाजपा दिया! सबक सीखा दिया आदि-आदि! और तो और कुछ प्रगतिशील लेखक, समाजवादी विचारधारा के पोषक बंधु, लोहियावादी भू भाई और साम्यवादी विचारधारा के लोग भूमिहार समाज के नाम पर गाली सुनवाने वाले कन्हैया जी महाराज को भी वोट देने की अपील करते दिखाई देते हैं!

भईया अपनी-अपनी सोच है लेकिन एक आम भूमिहार की भांति जब मैं सोचता हूं तो मुझे इतना तो अवश्य ही अहसास हो रहा है कि ये लोग पिछले चुनाव में भी इसी तरह का नौटंकी किए होंगे और मेरा पूरा विश्वास है कि आज जो लोग समाज के नाम पर और जाति के नाम पर कन्हैया की वकालत कर रहे हैं अवश्य ही सेकुलरिज्म नामक बीमारी से ग्रसित लोग हैं और जिनको यह बीमारी हो जाती है वो कोई न कोई उपाय लगा कर काम बिगाड़ने की कोशिश करना शुरू कर देते हैं!

अरे भईया सीट नहीं दिया भाजपा ने तो जोलहा नहीं न हो जाएंगे!एक तो सीटें घट गई और उपर से सारे अन्य जातियों, समुदाय को भी तो देखना होगा आप सब समझ रहे हैं कि बिहार में तो एकमात्र भूमिहार ही है और फिर मैं तो तो यह भी कहुंगा कि आपको जो सीट मिलेगी विभिन्न क्षेत्रों से वहां से सबको जीता देंगे? मैं अपने उम्र में अनेकानेक चुनाव देख चुका हूं, भूमिहार के लइकन मोबाइल पर ही किसी को जीता देंगे और किसी को हरा देंगे और जिस दिन वोटिंग होगा न तो बुथ पर आप नहीं दिखाई देते, दूसरे लोग ही हर जगह दिखाई देते हैं और बात तो करेंगे कि ये बाघ मार दिया, तो वो बाघ मार दिया!

देखिए मेरा उद्देश्य आपको हतोत्साहित करना कदापि नहीं, वरन् आपको जागृत करना है। आप क्यों इतना उतावला हो जाते हैं? आपको किसने रोका है कि आप अपने समाज के लोगों को मत वोट दो! आप आराम से मत बना सकते हैं कि चलो भाई, भाजपा ने हमारे लोगों को टिकट नहीं दिया तो हमें उसके स्थान पर दूसरे लोग को चुन लेना है!

किन्तु आप से यह भी नहीं होगा, चूंकि मैं जहां तक समझता हूं कि आप अकेले कहीं कुछ नहीं कर सकते! हां आप एक नहीं अधिकांश क्षेत्र में परिणाम बदलने का माद्दा रखते हैं और ऐसा आप कर भी सकते हैं लेकिन भईया तब भी ध्यान रहे कि हमारे मत से देश के टुकड़े करने वाले को तो लाभ नहीं मिल रहा, सेना के मनोबल तोड़ने वाले को तो लाभ नहीं मिल रहा,भारत को पाकिस्तान समझने वाले को तो लाभ नहीं मिल रहा, सेकुलरिज्म से ग्रसित लोगों को तो लाभ नहीं मिल रहा,या समाज के ही सही कन्हैया जैसे लोगों को तो लाभ नहीं मिल रहा!

कारण है कि हमारा समाज कुछ भी कर सकता है लेकिन एक देशद्रोही होना कभी पसंद नहीं करेगा, जोलहा होना कभी पसंद नहीं करेगा, सेकुलरिज्म रोग से पीड़ित होना कभी पसंद नहीं करेगा! इसलिए मैं नहीं निवेदन करना चाहता हूं कि आप भाजपा को वोट दें आप को जहां अपने मत को देना है दें लेकिन उपरोक्त कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें, क्योंकि मैं जानता हूं कि युवा पीढ़ी बहुत तेजी से आक्रोशित हो जाता है और अगर सही ढंग से समझा दिया जाए तो समझ भी जाता है।इन सारी बातों को लिखते हुए ऐसा भी लगता है कि कुछ लोग मुझसे असहमत भी होंगे, लेकिन चूंकि भू-समाज का मैं भी एक सदस्य हूं और मुझे लगा कि कुछ लिखना चाहिए, शायद हमारे समाज के युवा पीढ़ी मेरी बातों को हल्का ही सही,तबज्जो दे और अपने फटाफट विचार बदल लेने की प्रक्रिया को थोड़ा विराम दें।आगे आपकी मर्जी

आपके ही परिवार का एक अदना सा सदस्य
राम भवन शर्मा
उर्फ़ गुरुजी।
जय हो भू समाज की!

भूमिहार ब्राह्मण समाज को उचित सम्मान नहीं मिलेगा तो विरोध किया जाएगा

-राहुल सिंह

Rahul Singh
Rahul Singh

लोकसभा चुनाव में भाजपा के कोर वोटरों को विघटन करने की बहुत बड़ी साजिश NDA के कुछ बड़े नेताओ द्वारा रची जा रही है। अभी हाल में ही सवर्ण समाज के लोग मोदी सरकार द्वारा 10%आरक्षण देने बहुत खुश थे और सबने एक स्वर में मोदी जी को दुबारा प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लिया। लेकिन NDA के कुछ नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा सवर्णो को दिए गए 10% आरक्षण रास नही आया और उन्होंने एक नए प्लान जिसमे सवर्णो को आपस में लड़ाना शामिल है, उस पर काम करना शुरू किया। आज उसी प्लान के अंतर्गत लोकसभा चुनाव में क्षत्रिय समाज को 5 से 6 सीट और भूमिहार ब्राह्मण समाज को 1 सीट दिया जा रहा है।

भूमिहार ब्राह्मण समाज जो हमेशा भाजपा का कोर वोटर रहा है उसे सिर्फ 1 सीट देकर ये मंशा है कि इस समाज को उग्र कर या क्षत्रियो के खिलाफ भड़काकर सवर्ण एकता को खत्म कर दिया जाए। फिर ये नेता जो प्लान कर रहे है उनकी राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति हो सके। ऐसे नेताओ और पाटियों को चिन्हित करके अब सबक सिखाने का वक्त आ गया है। हमे क्षत्रिय समाज से कोई शिकायत नही है लेकिन NDA अगर भूमिहार ब्राह्मण को उचित सम्मान नही देगी तो विरोध किया जायेगा।।