Shyamandan Singh bhumihar

हैदराबाद – समाज के लिए एक बुरी खबर है। प्रख्यात समाजसेवी और उद्योगपति श्यामनंदन सिंह का निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनका निधन शहर के एक निजी अस्पताल में हुआ। उनकी अंत्येष्टि जगतगिरिगुट्टा स्थित श्मशान घाट में संपन्न हुई जहाँ कोरोनावायरस के खौफ के बीच भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। शहर के सामाजिक-धार्मिक और औद्योगिक क्षेत्र के अनेक लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताते हुए श्रद्धांजलि दी है।

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मूल रुप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांटी क्षेत्र के मैसाहा गांव में जन्मे श्यामनंदन सिंह ने सामान्य कर्मचारी के तौर पर निजी कंपनी में नौकरी शुरू की थी। सत्तर के दशक में बिहार से हैदराबाद पहुंचे श्यामनंदन सिंह ने जल्दी ही अपना कारोबार शुरू किया और उन्होंने सफलता की बुलंदियो को छुआ। अपनी मेहनत, ईमानदारी और कार्यकुशलता के बल पर वे एक कर्मचारी से कंपनी के शीर्ष पद पर पहुंचे और जीएम-वर्क्स के बाद नौकरी को अलविदा कहा। उनसे चार दशक के साथी रहे शहर के उद्योगपति रामगोपाल चौधरी बताते हैं कि अस्सी के दशक में हैदराबाद में मजदूर यूनियनों का उन्होंने नेतृत्व किया और नैनी नरसिम्हा रेड्डी के साथ मिलकर मजदूरों को हक दिलाने की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने जीटीमेटला इलाके में खुद की रबर फैक्ट्री लगाई और उसे एक बड़ा ब्रांड बना दिया।

हैदराबाद के कई सामाजिक संगठनों और धर्मार्थ संस्थाओं के गठन और संचालन में श्यामनंदन सिंह की बड़ी भूमिका रही। जगतगिरिगुट्टा स्थित भगवान परशुराम मंदिर की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही। वे ब्रह्मर्षि सेवा समाज के संस्थापकों में रहे और वर्षों तक अध्यक्ष के दायित्व को भी निभाया।

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श्यामनंदन सिंह अपने पीछे चार पुत्रों से भरा पूरा परिवार और बड़ा आर्थिक साम्राज्य छोड़ गये हैं। पिछले काफी समय से वे बीमार चल रहे थे। उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। रविवार को उनके निधन की सूचना पाकर लॉक डाउन के बावजूद लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे, जिसमें जगतगिरीगुट्टा के कारपोरेटर सहित टीआरएस, कांग्रेस और वामपंथी दलों के नेता भी शामिल थे। उद्योगपति रामगोपाल चौधरी ने उनके निधन को निजी क्षति बताते हुए कहा कि इसकी भरपायी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि श्यामनंदन बाबू का जीवन फर्श से अर्श तक पहुंचने की कहानी है। अपनी मेहनत, लगन और नेतृत्व क्षमता के बदौलत वे जीवन में एक अहम मुकाम बना सके।

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डॉ. सरज कुमार ने कहा कि उनके निधन से परशुराम मंदिर और ब्रह्रषि समाज ने अपना एक सच्चा हितैषी खो दिया है। श्यामनंदन सिंह के निधन पर ब्रह्मर्षि सेवा समाज की अध्यक्ष इंदिरा राय ने भी गहरी संवेदना प्रकट की है। अपने शोक संदेश में इंदिरा राय ने कहा कि हैदराबाद में ब्रह्रषि समाज के वे प्रमुख स्तंभ थे। उनके निधन से समाज को बड़ी क्षति हुई है , जिसकी भरपायी संभव नहीं। श्यामनंदन सिंह को श्रद्धांजलि देने वालों में रामगोपाल चौधरी, डॉ.सरज कुमार, संजीव मिश्रा, सुभाष सिंह,ललन ठाकुर, शंभू चौधरी, गिरिजेश चौधरी, शौरभ सिंह पूट्टू , आरएस शर्मा, तिरुपति राय, कामेश्वर, अनिल, सुनील, अमरेश,अविनाश, अखिलेश,प्रशांत, नीतीश, अनिकेत, आदित्य आदि प्रमुख रहे। (सौजन्य – साक्षी समाचार)

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