bhumihar or bhumihar brahaman

भूमिहार नहीं ‘भूमिहार ब्राहमण’ लिखिए, बड़े संघर्ष से मिला है ब्राह्मण उपनाम

 बाभन, भूमिहार और भूमिहार ब्राह्मण

एक ही सिक्के के तीन पहलू हैं – बाभन, भूमिहार और भूमिहार ब्राह्मण. बिहार में भूमिहार को बाभन भी कहते हैं. ये दोनों शब्द एक-दूसरे के पर्यायवाची है.पर पहले सिर्फ भूमिहार ही प्रचलित था. बाद में भूमिहार के साथ ब्राहमण शब्द भी जुड़ गया और सरकारी आंकड़ों में भूमिहार को ब्राहमणों की उपजाति के रूप में मान्यता मिली.

सरकारी आंकड़ों में भूमिहार ब्राहमण

सरकारी आंकड़ों में 1911 में भूमिहार शब्द के साथ ब्राहमण जुड़ा. उस वर्ष हुई जनगणना में लिखा गया – “भूमिहार ब्राह्मण का नाम सरकार ने स्वीकार कर लिया है और अब उन्हें बाभन (भूमिहार ब्राहमण) के रूप में दर्ज किया जाएगा.” इस तरह भूमिहार को भूमिहार ब्राहमण लिखने का हक आधिकारिक रूप से मिला और लोग अपनी जाति का उल्लेख गर्व से ‘भूमिहार ब्राहमण’ करने लग गए.

भूमिहार ब्राहमण की बजाये भूमिहार लिखने का प्रचलन

लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति बदली है. अब ऐसा अहंकार भाव में हुआ या फिर नादानी में ये कहना तो मुश्किल है लेकिन बहुत सारे लोग भूमिहार ब्राहमण की बजाये सिर्फ भूमिहार ही अपनी जाति बताने लगे.जबकि होना ये चाहिए कि हमे अपनी जाति बताते वक़्त ‘भूमिहार’ की बजाए ‘भूमिहार ब्राह्मण’ कहना चाहिए.हमारे पुरखों ने इसके लिए बहुत जतन किया था तब जाकर भूमिहार के साथ ब्राह्मण शब्द जुड़ा था।इसलिए आज से ही ये नियम बना ले कि जब भी आपसे कोई आपकी जाति पूछे तो कहिये भूमिहार ब्राहमण.

( यह भी पढ़े – भूमिहार ब्राह्मण का इतिहास, वर्तमान एवं भविष्य )

स्वामी सहजानंद सरस्वती ने दिलाया भूमिहारों को भूमिहार ब्राहमण का दर्जा

वैसे भूमिहारों को ब्राहमणों का दर्जा दिलाने का श्रेय भारत में किसान आंदोलन के प्रणेता स्वामी सहजानंद सरस्वती को जाता है. उन्होंने विभिन्न मंचों पर शास्त्रार्थ कर साबित किया कि भूमिहार भी ब्राहमण हैं. पुरोहिती के सवाल पर उन्होंने तर्क दिया कि पुरोहिती करना ब्राहमण के लिए जरूरी नहीं.ब्राहमण के लिए भी खेती-गृहस्थी पुरोहिती से कहीं अच्छी है और उसके अभाव में ही पुरोहिती करनी चाहिए. उन्होंने शास्त्रों का हवाला देकर कहा कि याचक और अयाचक ब्राहमण सदा से होते आये हैं और भूमिहार ब्राहमण अयाचक ब्राहमण है. उनकी बात को कोई नहीं काट पाया और भूमिहार ब्राह्मण को मान्यता मिली. बाद में स्वामी जी ने इसे और ठोस रूप देते हुए,भूमिहार ब्राहमण परिचय और ब्रह्मऋषि वंश विस्तार नाम से किताब लिखी.

और पढ़े – बिहार के भूमिहार ब्राह्मणों के पौरोहित्य का विराट इतिहास

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6 COMMENTS

  1. बिल्कुल सही लिखा गया है इस लेख में। जब भी भूमिहार शब्द कहे या लिखें ब्राह्मण अवश्य लगाएं।

  2. भूमिहार ब्राह्मण शब्द का मुझे तब पता चला जब मैं अपनी जोइनिंग के लिए सेना में आया था तब मुझसे कास्ट पूछा गया था मैं भूमिहार कहां। हमारे उस्ताद ने कहा भूमिहार ब्राह्मण बोलो तब मुझे पता चला कि हमारी जाति भूमिहार ब्राह्मण है।
    कुल मिलाकर कहना चाहता हूं कि हमें अपने बच्चों को उनकी जाति के बारे में बताना चाहिए

  3. bhumihar is the sub caste of brahmin like mathil,kankubja,sayrupreen etc types of brahmins.bhumihar is also a brahmin found in bihar and purvanchal utter pradesh.so please tells your caste is bhumihar brahmin not only bhumihar,

  4. Itihas me brahmano ka ek dal purohiti ka yani puja path ka kaam chhor dusre kaam ker apna jivan yapan karne lage uss daur me kheti karna hi bharat me uttam karya mana jata tha aur jo brahman purohiti chhor kheti me lagg gaye wo ayachak brahman kahe jaane lage aur waqt bitne k baad jo brahman purohiti se jure rahe unhe hi bas daan lene ki hakk hai aur brahman ka kaam ishwar ki sewa karna aur daan lena hai aur jo brahman ye kaam bahut pahle chhor diye thhe purohiti karne wale yani yachak brahmano ne ayachak brahman ko brahman maanne se inkaar ker diya jiske wajah se bhumihar ko brahmano ka darja dilane k liye swami sahjanand sawaraswati ko larna padaa bhumihar,tyagi,chitpawan,ayaar,mohiyaal etc desh ke alag alag bhag me paye jane wale ayachak brahman hai jisme se bahuto ayachak brahmano ko brahmano ka darja nahi mil paya hai aur bhumihar brahman inhe bhi apna sadasya mante hai kyoki ye ayachak brahman bhi parsuram bhagwan ko apna isthdev mante hai,aur kheti karne ki wajah se jameen se jur gaye brahman hi baad me jameendar brahman kahe jaane lage

  5. क्या महाराष्ट्र के चित्पावन ब्राह्मण भी भूमिहार है?

  6. आज कल लोग भूमिहार को ही जाति मान बैठे हैं| भूमिहार शब्द सबसे पहले 19 वी शताब्दी में सयुंक्त प्रान्त के दस्तावेजों में प्रतीत हुआ| यह शब्द भूमि (आईने अकबरी का) या भौमिक शब्द का पर्याय के रूप में उपयोग हुआ| ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी कोर्ट के शब्दावली के अनुसार भूमिहार शब्द भूमि और हार शब्द से बना है, यह शब्दावली जनवरी 1855 में प्रकाशित हुआ था| भूमि का अर्थ है, अनुवांशिक भूसम्पत्ति जो कर से मुक्त हो (Bhoomi means a hereditary landed estate free of assessment) और हार का अर्थ है जो लिया हो या रखता हो(haar means who takes it)| प्रारंभिक 19वी शताब्दी में भूमिहार वो लोग थे जो अनुवांशिक भूसम्पत्ति रखने थे |[1][2] ये शब्द ब्राह्मण के भूमिधारी वर्ग के लिए भी उपयोग होता था जिन्हे बाभन या सैन्य ब्राह्मण (military Brahmin) कहा जाता था और अन्य भूमिधारी लोग भी इस शब्द का अनुवांशिक भूसंपदा दर्शाने के लिए उपयोग करते थे|
    प्रारंभिक 20 शताब्दी तक भूमिहार शब्द जाति विशेष के लिए न हो कर बस भूमिपति होने का सूचक था| ब्राह्मण भूमिधारियों को बाभन या सैन्य ब्राह्मण (military Brahmin) के नाम से जाना था| बाभन ब्रिटिश रिकार्ड्स में मिलिट्री ब्राह्मण के नाम से दर्ज थे[3][14][15]| बाभन जाति का नाम था और भूमिहार उसके भूस्वामी होने का सूचक था| 19 वी शताब्दी में कुछ जलनशील समुदाय के लोगों द्वारा बाभनो के बारे में मिथक और कल्पित कथा गढ़ा गया| जिसमे यह दिखाया गया बाभन शब्द का मतलब ब्राह्मण नहीं अपितु गिरा हुआ, पतित और मिथ्या ब्राह्मण है|[3a,b] 20 वी शताब्दी के प्रारम्भ (1906 और 1910) में बाभन और बाम्भन शब्द सम्राट अशोक के शिलालेखों में मिला जो मगधन या मागधी प्राकृत भाषा में लिखा था[6][17]| ये बाभन शब्द मगही ब्राह्मणो के लिए प्रयुक्त हुआ था| इसके बाद कुछ इतिहासकारो ने यह अनुमान लगाना सुरु कर दिया की बाभन वो ब्राह्मण थे जो बौद्ध हो गए और बाद में हिन्दू बन गए| ये सिद्धांत एक कल्पना थी जो बाभन शब्द के शिलालेखों में मिलने के बाद की गयी | 1916 में रामप्रशाद चंद्र द्वारा ये दिखाया गया की बाभन शब्द अशोक के शिलालेखों में तो हैं पर उसमे ये कुछ भी नहीं कहा गया है की वो बौद्ध थे[6]| बाभन केवल मगधन भाषा (मागधी प्राकृत) का शब्द है और इसका संस्कृत में अर्थ ब्राह्मण है|[18] 19वी शताब्दी के अंत में कुछ समुदाय द्वारा बाभनो के बारे में मिथ्या और काल्पनिक कथा प्रचारित करने के प्रतिउत्तर में बाभन जमींदारों ने एक सभा का आयोजन किया जिसे बाद में भूमिहार ब्राह्मण सभा का नाम दिया गया| बाभन के बदले भूमिहार ब्राह्मण नाम प्रचारित करने का भार लंगट सिंह और अन्य भूधारी बाभनो को दिया गया| 1911 के ब्रिटिश जनगणना के उपरांत ही बाभन शब्द में भूमिहार ब्राह्मण शब्द जुडा| उसके पहले के जनगणना (जैसे 1872,1881,1891,1901,1911) में बाभनो को बस बाभन नाम से ही दर्शाया गया था|[5][10] संयुक्त प्रान्त में भूमिहार शब्द का उपयोग किया गया था और उसे भी बाभन का हिस्सा दिखाया गया था| आज वही भूमिहार ब्राह्मण नाम बस भूमिहार बन कर रह गया है| बाभनो को बाभन आदि काल से बोला जा रहा है, भूमिहार तो 19वी शताब्दी में मिली उपाधि है| आज के समय बाभन अपने प्राकृतिक और प्राचीन नाम से कम और अपने भूमिहार उपाधि से ज्यादा जाना जाने लगे है| स्वयं कशी नरेश (जिन्होंने भूमिहार ब्राह्मण नाम को बनाया और बढ़ाया) ने ब्रिटिश सरकार को लिखे पत्र में स्पस्ट किया था की भूमिहार कोई जाति नहीं बल्कि भूमि के कारोबार का सूचक शब्द है| जैसे मैथिल या कन्नोजीअ कहने से बस जगह का पता चलता है उसी तरह भूमिहार मात्र भूमिधारी होने का बोधक है| आज लोग भूमिहार को ही जाति मान बैठे हैं| जाति का नाम बाभन है और भूमिहार उसकी उपाधि है| जिस तरह राजपूत एक जाति का नाम है और ठाकुर उनका प्रशिद्ध उपाधि है उसी तरह बाभन या भूमिहार ब्राह्मण व भूमिधारी ब्राह्मण व सैन्य ब्राह्मण (military Brahmin) जाति का नाम है और केवल भूमिहार उनका उपाधि है| जिस प्रकार ठाकुर शब्द हर जगह राजपूत जाति के लिए नहीं प्रयुक्त होता है |उसी प्रकार भूमिहार शब्द केवल बाभनो के लिए ही नहीं प्रयुक्त होता है| असम और छोटानागपुर में भूमिधारियों के लिए भूमिहार शब्द प्रयुक्त होता है जो बाभनो से किसी भी प्रकार से नहीं जुड़े हुए हैं|[4] 20 वी शताब्दी के मध्य (अराउंड 1960) के बाद से बाभन शब्द का धीरे धीरे प्रतिष्ठित पत्रिका और पुस्तक से लोप होने लगा| अन्य ब्राह्मण समुदाय इसी समय यह शब्द अपने लिए प्रयोग करने लगे| 19वी और प्रारंभिक 20 वी शताब्दी तक बाभन शब्द का अर्थ पतित ब्राह्मण निकला जाता था और इसे भूमिपति होने के कारन भूमिहार कहा जाता था| यदि ये शब्द प्रारम्भ से ही सभी ब्राह्मणो के लिए प्रयुक्त होता तो बाभन शब्द को 19वी और प्रारंभिक 20 शताब्दी में अनादरसूचक नहीं बताया जाता[3][11][12][16]17]| सभी मिलिट्री ब्राह्मणो (military Brahman) को किसी न किसी काल में अनादर का सामना करना पडा है[3][15][14]| बाभनो को भी यह ज्ञान होना चाहिए की भूमिहार कोई जाति सूचक शब्द नहीं बल्कि भूमिपति होने का बोध करने वाला शब्द है| बाभन ही उनकी जाति का नाम है जो बृहद ब्राह्मण वर्ग का ही एक सैन्यकरण किया हुआ भाग है| बाभनो ( भूमिहार ब्राह्मणो ) जैसा सैन्य ब्राह्मण (Militarised Brahmin ) भारत के बिभिन्न भागो में अन्य नाम से जाने जाते है जैसे त्यागी , मोहयाल, चितपावन, नियोगी, अनाविल, अन्य (babhan are militarized Brahmin like mohyal, tyagi, chitpawan, niyogi, anavil, etc) | प्राचीन काल में ब्राह्मणो का सैन्यकरण(militarization) बस बिहार या उत्तर प्रदेश में ही नहीं हुआ था ये सारे देश में हुआ और वैसे सैनिक ब्राह्मणो का अलग पहचान है और उन्हें अयाचक ब्राह्मण भी कहा जाता है| ये सारे अयाचक ब्राह्मण परशुराम को अपना मूल पुरुष मानते हैं| मगध के प्राचीन ब्राह्मण, बाभन है और उनका इतिहास अशोक के समय से है| पुष्पमित्र शुंग और कनवा वंश मगध के प्राचीन ब्राह्मणो का है| प्राचीन मगध में सैन्य और प्रशाषन में बाभनो का महत्यपूर्ण योगदान रहा है| बाभनो का भूमिहार उपाधि 19 वी शताब्दी का है और ज़मींदारी हटने और भूमि सुधार होने के बाद इस शब्द का कोई अर्थ नहीं रहा|[5][6][8]
    References:
    [1] A glossary of judicial and revenue terms
    https://archive.org/details/cu31924023050762/page/n115
    [2] Hindu Castes and Sects: An Exposition of the Origin of the Hindu Caste yogendra nath bhattacharya
    https://archive.org/details/hinducastesands00bhatgoog/page/n132
    [3,a] The Tribes And Castes Of Bengal: Ethnographic Glossary, Volume 1 By Risley, Herbert Hope, Sir, (https://archive.org/details/TheTribesAndCastesOfBengal/page/n139
    [3,b] Census Of India 1901 Vol.1 (india ) (ethnographic Appendices) By Risley, Herbert Hope, Sir, (https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.55922/page/n199
    [4] Census of India, 1901 by India. Census Commissioner
    https://archive.org/details/cu31924071145571/page/n233
    [5]Peasants and Monks in British India by William R. Pinch
    Peasants and Monks in British India (https://publishing.cdlib.org/ucpressebooks/view?docId=ft22900465&chunk.id=s1.3.13&toc.id=ch3&toc.depth=1&brand=ucpress&anchor.id=d0e4900#X)
    [6] Indo-Aryan races: a study of the origin of Indo-Aryan people and institutions : Chanda, Ramaprasad
    (https://archive.org/details/Indo-aryanRacesAStudyOfTheOriginOfIndo-aryanPeopleAndInstitutions/page/n173)
    [7] Hindu Tribes and castes
    Hindu Tribes And Castes Vol 1 : Sherring : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive (https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.469749/page/n63)
    [8] Census of india 1901, Census of India, 1901 : India. Census Commissioner : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive (https://archive.org/details/cu31924071145571/page/n405)
    [9] East India (Census) [microform] : General report of the census of India, 1901
    ( https://archive.org/details/pts_eastindiacensusg_3720-1115/page/n513)
    [10]Census of India 1931 (Census Of India 1931 Vol.7 Bihar And Orissa Pt.1 Report : Lacey, W.g. : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive)
    [11]. Statistical Account Of Bengal Vol.12 : Hunter, W.w. : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive (https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.534069/page/n197)
    [12]. A Statistical Account Of Bengal Vol.xiii : W.w.hunter : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive (https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.279433/page/n237?q=babhan)
    [13]. Report of a tour in Bihar and Bengal in 1879-80. Vol. 15 : Cunningham, Alexander : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive (https://archive.org/details/pli.kerala.rare.12155/page/n121)
    [14]. A Manual of the Land Revenue Systems and Land Tenures of British India : Baden Henry Baden -Powell : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive (https://archive.org/details/amanuallandreve01powgoog/page/n247)
    [15]. Report On The Census Of Bengal(1872) : Beverley, H. : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive (https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.94529/page/n217)
    [16]. Bengal District Gazetteers Sahabad : O’malley L. S. S. : Fre (https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.206888/page/n59)e Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive
    [17]. Bengal District Gazetteers Darbhanga : O’malley L. S.s. : Free Download, Borrow, and Streaming : Internet Archive (https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.206867/page/n55)
    [18] Journal of the American Oriental Society by American Oriental Society
    https://archive.org/details/journalvolume04socigoog/page/n90
    [19] Memoirs on the History, Folk-Lore, and Distribution of the Races of the North Western Provinces of India, Vol. 1
    https://archive.org/details/memoirsonhistory01henr/page/24 (inferior Brahman)
    [20] Imperial Gazetteer Of India Vol 2
    https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.281524/page/n225(inferior Brahman)
    [21] The Imperial Gazetteer Of India Vol Xxiii Singhbhum
    https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.61214/page/n285 (tekari raj)
    [22] Journal Of The Asiatic Society Of Bengal 1904 Vol Lxxiii Part I
    https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.280545/page/n191 (Hathua raj)

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