nitish bhumihar

बिहार में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और इस बार हरेक दल की नज़र भूमिहार ब्राह्मण समाज के वोटरों पर है कि उसका वोट किसे मिलता है? भूमिहार समाज का एकमुश्त वोट अबतक भाजपा और नीतीश को मिलता रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय में नीतीश कुमार और भूमिहार समाज के बीच एक दूरी बनी है. यही वजह है कि इस बार के चुनावों में ये सवाल उठ रहे हैं कि अबकी भूमिहार समाज नीतीश कुमार को वोट देगा या फिर या किनाराकशी करेगा? इस मुद्दे पर आलेख –

वोट किसको देंगे? सवाल सीधा था लेकिन 76 साल के सेवानिवृत्त शिक्षक वीरेंद्र महतो झल्लाते हुए जवाब देते हैं। हमको क्या मतलब है, कोई हमारा जाति का नेता थोड़े चुनाव लड़ रहा है। वीरेंद्र महतो जाति से धानुक हैं। और,बिहार में यादव के बाद धानुक जाति के मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। लेकिन, आज तक धानुक का कोई ऐसा नेता नहीं उभरा जो उस जाति का चेहरा बन पाया हो।

वीरेंद्र महतो का एक लाइन का जवाब हमारे लिए काफी था कि इस बार का बिहार विधानसभा चुनाव भी जाति के नाम पर ही लड़ा जा रहा है। संयोग से इस बार जाति आधारित दलों की संख्या भी पिछले चुनावों से ज्यादा हो गई है। यादव-मुस्लिम के लिए राजद तो कोयरी के नेता उपेंद्र कुशवाहा बने हैं। जीतन राम मांझी मुसहर का प्रतिनिधित्व चेहरा हैं तो वीआइपी वाले मुकेश अब मल्लाहों के स्वघोषित नेता हैं। बाकी पासवान के लिए लोजपा और कुर्मी के लिए जदयू के नीतीश कुमार हैं ही।

बावजूद इसके सवर्ण सहित कई अन्य जातियों का आजतक कोई खास दल नहीं है। एक समय तक भाजपा को सवर्णों की पार्टी कहते थे लेकिन अब वहां भी सवर्ण हासिये पर हैं। एससी-एसटी से जुडी कई जातियों का कोई नेता या प्रतिनिधित्व दल नहीं है।

और इन्हीं जातियों की तरह भूमिहार की स्थिति है। लालूराज को उखाड़ फेंकने के लिए सबसे ज्यादा संघर्ष भूमिहार जाति ने किया था। लालू यादव से ‘बेवजह’ के उस संघर्ष में चाहे वह मगध हो या तिरहुत का मुजफ्फरपुर, भोजपुर से पाटलिपुत्र तक 15 साल भूमिहार बनाम लालू की लड़ाई ही रही। और संघर्ष में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए नीतीश कुमार तब समता पार्टी के साथ भूमिहार के करीब हुए।

2005 में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तब शायद कुर्मी से ज्यादा भूमिहार ही खुश हुए। और ऐसा नहीं है कि भूमिहार को नीतीश ने निराश किया। याद कीजिये तब प्रदेश अध्यक्ष रहते जो ताकत ललन सिंह को थी, वह महेश बाबू और कैलाश पति मिश्र (कर्पूरी ठाकुर-रामसुंदर दास सरकार में) को छोड़कर भूमिहार समाज में किसी को नहीं मिली। और आज भी नीतीश सरकार या जदयू में ललन बाबू ही नम्बर 2 माने जाते हैं।

इतना ही नहीं नीतीश ने जब गद्दी संभाली तो सबसे ज्यादा विश्वास भूमिहार नेताओं और अधिकारियों पर ही किया । पीके शाही और ललित किशोर दो-दो महाधिवक्ता। शशांक कुमार सिंह और अशोक सिन्हा दो-दो मुख्य सूचना आयुक्त।एक साथ अशोक सिन्हा और अभयानंद को मुख्य सचिव और डीजीपी, शिशिर सिन्हा बीपीएससी के चेयरमैन हुए।

रामदयालु सिंह के बाद विजय चौधरी दूसरे भूमिहार रहे जो विधानसभा अध्यक्ष हुए।। स्वर्गीय रामाश्रय सिंह से लेकर विजय चौधरी, ललन सिंह, पीके शाही, रामानंद सिंह, अजीत कुमार, महाचंद्र सिंह ,अनिल कुमार, नीरज कुमार जैसे सभी भूमिहार चेहरे को मंत्री पद मिलता ही रहा। यहां तक कि सूरजभान, मुन्ना शुक्ला से लेकर अनंत सिंह जैसे कई ‘बाहुबली’ को बाहुबली बनने का पहला मौका भी नीतीश कुमार के कारण ही मिला वर्ना नीतीश ने नहीं चाहा तो शहाबुद्दीन जैसे कई साहेब को आज तक बेल नसीब नहीं हो पाया।

नीतीश कुमार द्वारा लगातार सत्ता में भूमिहार को इतनी बडी भागीदारी देने के बाद भी आज भूमिहार फिर से अनावश्यक रूप से खुद को नीतीश विरोधी दिखाने के लिए आमदा है। अगर देखा जाए तो श्री बाबू के बाद से जितनी सरकार बिहार में आई उसमे सबसे ज्यादा हिस्सेदारी नीतीश ने ही भूमिहार को दिया। लेकिन इसका मेसेज समाज में नहीं गया। और आज नीतीश विरोध के नाम पर जो दल पर्दे के पीछे से भूमिहार को उकसा रहे हैं उनके यहां भूमिहार सर्वाधिक ‘अछूत’ है।

इसलिए प्रोफेसर प्रमोद शाही कहते हैं कि सोचने की जरूरत है कि भूमिहार किसी के हाथों की कठपुतली न बन जाएं। लालू विरोध में जैसे भूमिहार का उपयोग हुआ और आज राजद या लालू के यहां भूमिहार की कोई पूछ नहीं है, कहीं ऐसा न हो कि बेवजह नीतीश विरोध में भी सिर्फ भूमिहार का उपयोग हो।

मुझे फिर वीरेंद्र महतो की बात याद आ रही है। हमारी जाति का नेता कौन। धानुक की आबादी होते हुए भी वे हासिये पर हैं। तो भूमिहार तो पहले से कम है। ऐसे में यह जरूरी है कि जो जितना अधिक सम्मान देगा उसको वोट देंगे और समर्थन करेंगे। ना काहू से दोस्ती ना काहू से वैर। ( पत्रकार विशाल तिवारी के वॉल से साभार)

1 COMMENT

  1. Sir , main uparokt baaton se sahmat hu lkn Puri trh nhi .Lalan ji sayad dikhane wale neta ji h lkn abb 2 no. P abb R.C.P.singh h or eek trh se wahi sarkar chala rhe h .Ha ye baat h ki jab tak R.C.P singh 2 no. nhi the tab tak nitish ji n sabse jyada izzat diya .aap udaharan k taur pr sarkari Bharti m dekh sakte h pichchle kayi state level ki bharti m jis trah jativad k khel khela gya usse to virodh hi utpann hona swabhabik h …dusra udaharan SC ST act k durupayog hone m unka samarthan …fir Patna gandhi maidan m pradarshan kar rhe 10000 bhumihar yuva pe berahami se Lathi charge .police bharti m general categories se kam se kam bharti krna ….usi trah Bihar Si m jativad ,BPSC m jativad k basis p bharti …or to or kuchh unki niji comments bhi the ki jab tak Hum hari churi walion(Jo bhumihar jati ki mahilaon ko ingit karte hue ) ko khet m kam k liye na pahuncha du tab tak badla pura nhi hoga . …karan bhut h Nitish ji se duri bnane k liye ..

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