Bhumihar Politics
Bhumihar Politics

-ब्रहमर्शी चिंतक 

कहार शब्द का नाम लेते ही समाज के उन लोगों की याद आती है जो लोग दूल्हा-दुल्हन की डोली उठाते थे और उस डोली को अपने कंधे पर उठाकर दुल्हन के घर से दूल्हे के घर तक पहुंचाते थे ।
देखने में यह जितना ख़ुशी से भरा कार्य लगता था वास्तव में उतना ही कठिन और परिश्रम का कार्य था जिसमें उत्तरदायित्वों का भी अदृश्य लेकिन अपार बोझ था ।

Rajeev Kumar
Rajeev Kumar

आज भूमिहार समाज की भूमिका एक राजनैतिक कहार की हो चुकी है जो अमूमन हर राजनैतिक पार्टियों में झण्डाबरदारी करते नजर आ रहे हैं । सभी पार्टियों के झंडा ढोने के बावजूद इस समाज की न तो सूरत बदल रही है और न ही इसकी सीरत । क्या हैं इसके कारण आइये इसका फिर से अध्ययन करते हैं ।
मूल रूप से कृषि पर निर्भर भूमिहार समाज शुरू से ग्रामीण राजनीति एवं अर्थव्यवस्था का सिरमौर रहा है । देश की आज़ादी में अनेकों पढ़े लिखे विद्वान एवं क्रांतिकारियों की कुर्बानी ने सदैव भूमिहार को अन्य जातियों के बीच एक आदर्श जाति के रूप में अग्रणी रखा और जब देश आज़ाद हुआ तो समाजसेवा रुपी लोकतान्त्रिक व्यवस्था के सफल संचालन हेतु बिहार का प्रथम मुख्यमंत्री भी भूमिहार समाज के डॉक्टर श्री कृष्ण सिंह को बनाया गया ।
श्री कृष्ण सिंह के नेतृत्व में बिहार में सर्वाधिक तरक्की हुई और बहुत सारे उद्द्योग लगे जिसमें पढ़े लिखे लोगों को रोजगार मिला ।
श्री कृष्ण सिंह के अद्भुत नेतृत्व के माध्यम से भूमिहार समाज ने अन्य जाति विशेष में अपनी राजनैतिक नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया और समस्त बिहारवासियों के समक्ष भूमिहारों की गुणवत्तापूर्ण राजनैतिक क्षमता का प्रतिमान भी स्थापित किया ।
लेकिन 1990 के उपरान्त मंडल की राजनीति के आगमन से हुए उथल पुथल में भूमिहार समाज सर्वाधिक प्रभावित हुआ और अपनी प्रमाणित राजनैतिक क्षमता के सदुपयोग से वंचित हो गया या यूँ कहें कि कुछ छलिया प्रवृति के लोगों के छद्म का शिकार होकर हासिए पर चला गया ।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुखद है कि सबसे अधिक प्रमाणित राजनैतिक प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता रखने के बावजूद भूमिहार समाज को आज सभी पार्टियों में राजनैतिक कहार की भूमिका में देखा जाता है ।
सचमुच इतना प्रतिभासम्पन्न और सुसभ्य तथा शांति एवं न्याय प्रिय भूमिहार समाज आज राजनैतिक कहारी कर रहा है जबकि इस समाज को आज आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए ।
इस राजनैतिक कहारी करने की विवशता या उसके कारण पर जब हम गंभीर नज़र डालते हैं तो जो सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कारक उभरकर सामने आ रहा है वह है अच्छे और विद्वान तथा सच्चे सामाजिक चरित्र वाले भूमिहार समाजसेवियों का राजनीति में सख्त अभाव । जबतक पढ़े लिखे योग्य एवं समर्पित युवा तथा बुद्धिजीवी आगे बढ़कर भूमिहार समाज की राजनीति की बागडोर नहीं थामेंगे तबतक भूमिहार समाज की राजनैतिक कहारी ख़त्म नहीं होने वाली है । आज जिधर भी देखिये उधर अधिकतर दलाल एवं अपराधी प्रवृति के लोग ही भूमिहार समाज की राजनीति की बागडोर अपने हाथों में लिए हुए हैं और ये छलिया लोग ( रावण ) ही समस्त भूमिहार समाज को राजनैतिक कहार बनाकर रख दिए हैं ।
इन आपराधिक व दलाल प्रवृति के लोगों ने अपने आपराधिक व भ्रष्टाचारी कृत्य से खुद को बचाने के लिए दूसरे समाज के समान विचारधारा वाले राजनैतिक लोगों से साझा एजेंडा के तहत गुपचुप समझौता कर रखा है और अपने निजी हित साधने हेतु लगातार अपने ही समाज को पतन की ओर धकेलने का निरन्तर कुचक्र भी रच रहे हैं ।
जबतक इन आपराधिक एवं भ्रष्ट लोगों के राजनैतिक प्रवेश पर पूर्ण विराम नहीं लगाया जाता तबतक भूमिहार समाज का पुनरूत्थान संभव नहीं ।
आइये सारे भूमिहार युवा एवं बुद्धिजीवी यह शपथ लें कि हम सब मिलकर इस राजनैतिक कहार की छवि से पूरे भूमिहार समाज को बाहर निकालेंगे एवं इसके लिए योग्य एवं समाज के प्रति समर्पित पढ़े लिखे विद्वान व सच्चे सामाजिक पुरोधा लोगों को आगे लाकर उनको अपना राजनैतिक समर्थन देकर विजयी बनाएँगे एवं इसप्रकार फिर से भूमिहारों की वो पुरानी गौरवशाली स्वस्थ एवं सामाजिक राजनीति का सूत्रपात करेंगे जिससे हमारा देश एवं राज्य तेजी से तरक्की कर सके ।

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