-उमेश भारद्वाज

आज भी भूमिहार समाज आपस में लड़ रहे है इसी का परिणाम है कि किसी भी पार्टी में इनको इज्जत नही मिलती है। जिस दिन समाज एक हो जाय उस दिन नीतीश और मोदी क्या सब के सब समाज को पूजेगा। और यही समाज कल को नेतृत्व कर्ता होंगे  लेकिन आपसी बैमनश्य इसे और कहाँ तक डुबाती है यह एक विचारणीय प्रश्न है?

Umesh Bhardwaj
श्री उमेश भारद्वाज

आखिर बुद्धिजीवी किस काम की जो अपने समाज के साथ ही न दे?  फिर भूमिहार ब्राह्मण कहलाने का हक खोते जा रहा है यह समाज  और आनेवाला समय और दुखदाई होंगी अगर स्थितीयों में कोई बदलाव न लाया गया तो । समाज में अब किसी का तो कोई सुनने वाला रहा ना ही कोई बोलने वाला और न ही कोई सेतु का काम करने वाला जो दो किनारो को जोड़कर एक सेतु बना सके। जिसमें  जनमानस को सुख और सुविधा कैसे मिले इसका ख़याल हो, समाज को  आज भी ऐसे जैन-नायकों की तलाश है?

समाज में ऐसे युवक  जो दो किनारो को जोड़ना जानता हो आज ऐसे विचारधारा वाले लोगों  की कमी के कारण समाज हासिये पर है। और तो और आज कुछ असंगत लोग जो अपने ही समाज को कांग्रेस, बीजेपी, राजद, जदयू और लोजपा जैसी निक्कमी पार्टीओ का  दामन थाम कर अपने आप को समाज के हितैसी बनना चाहते हैं। मुझे तो  अब कुछ लिखने में  भी शर्म आती है लेकिन दिल है कि मानता नही समाज की दशा और दुर्दसा देखकर। हम भी समाज के ही बीच रहते हैं भूमंत्र हो या अन्य मंच  सब को आपसी सहमति कैसे बने इसके लिए जमीन पर उतरकर काम करने की जरूरत है उससे ही समाज की त्रुटियां दूर होगी आपस में मिलकर हम कड़ी से कड़ी परेशानियो को दूर कर सकते हैं।