जगदीश्वर चतुर्वेदी-

मुसलिम देशों में मदिरापान बडे़ पैमाने पर होता है,प्राचीनकाल में तो मुसलिम औरतों के मदिरापान करने का जिक्र मिलता है। हसन निजामी मानते थे  मदिरापान की अनुमति सबको है सिवाय मूर्खों के,जिनके दिमाग में शरीयत का भूत सवार है।अमीर खुसरो भी नमक की तरह मदिरा के प्रयोग को वैध मानते थे।

यह दिलचस्प सच्चाई है कि कुरान में मदिरापान का कठोरता के साथ निषेध किया गया है लेकिन फ़ारसी परंपरा में मदिरापान को मान्यता दी गयी है, यहां तक कि हिन्दू परंपरा में भी मदिरापान वैध है।

इकबाल ने कहा है-

मस्जिद तो बना दी शब भरमें,ईमाँकी हरारतवालोंने।
मन अपना पुराना पापी है,बरसोंमें नमाज़ी बन न सका।।।।

(लेखक के फेसबुक वॉल से साभार)