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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान में एक बड़ी सफलता मिली है। यहां सुरक्षा बलों ने बुधवार को पुलवामा जिले में सर्वाधिक वांछित आतंकवादी कमांडर रियाज नायकू और उसके साथी को मार गिराया। इसके जरिए सुरक्षा बलों ने तीन मई को कुपवाड़ा जिले में मारे गए हमारे पांच सुरक्षाकर्मियों की मौत का बदला ले लिया है।

कश्मीर का मोस्ट वांटेड आतंकी और हिजबुल चीफ नायकू को मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के उसके पैतृक बेगपोरा गांव में घेर लिया गया था।

हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर नायकू और उसके सहयोगी को बुधवार तड़के मार गिराया गया, जबकि एक अन्य आतंकवादी को इस मुठभेड़ स्थल से दूर पुलवामा जिले के ख्रेव इलाके के शरशाली गांव में एक अलग ऑपरेशन में मारा गया।

नायकू की मौत की पुष्टि करते हुए एक वरिष्ठ सुरक्षा बल के अधिकारी ने कहा, “नायकू को उसके सहयोगी के साथ मार दिया गया है।”

“हमने कहा था कि हमारे बहादुरों, कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, लांस नायक दिनेश सिंह, नायक राकेश कुमार और उप-निरीक्षक सकीर खान की शहादत का बदला लिया जाएगा और हमने यह प्रतिज्ञा तीन दिनों के भीतर पूरी कर ली है।”

तीन मई को हंदवाड़ा तहसील के चांजीमुल्ला गांव में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में हमारे बहादुर सिपाहियों के अलावा दो आतंकवादी, एक पाकिस्तानी नागरिक और एक स्थानीय आतंकवादी भी मारे गए थे।

अधिकारियों ने कश्मीर घाटी में मोबाइल इंटरनेट को बंद कर दिया है और घाटी के अधिकांश प्रमुख शहरों में कर्फ्यू लगा दिया है, ताकि नायकू की मौत के बाद कोई कानून और व्यवस्था को प्रभावित न कर सके।

पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर के शीर्ष अधिकारियों के बीच कानून-व्यवस्था के मुद्दों को शांति से सुलझाने को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक बैठक हो चुकी है।

श्रीनगर शहर में, जिला मजिस्ट्रेट ने घोषणा की है कि पांच मई को या उससे पहले जारी किए गए सभी कर्फ्यू पास रद्द कर दिए गए हैं और दो दिनों के बाद नए पास जारी किए जाएंगे।

अधिकारी इस सबसे वांछित आतंकवादी कमांडर को मारने के बाद कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।

एक अधिकारी ने कहा कि जुलाई 2016 में इसी तरह जब नायकू के पूर्ववर्ती और हिजबुल पोस्टर बॉय चीफ कमांडर बुरहान वानी को मारा गया था, तब कानून और व्यवस्था की स्थिति बन गई थी, इस बार ऐसी स्थिति बनने का मौका ही नहीं दिया जाएगा।

तब बुरहान की मौत के बाद घाटी में छह महीने तक अशांति रही थी और उस दौरान सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी।

नायकू की तलाश में सुरक्षा बलों ने पुलवामा जिले के अवंतीपोरा कस्बे के पास नायकू के गांव बेगपोरा में मंगलवार शाम को भारी तलाशी अभियान शुरू किया था।

सूत्रों ने बुधवार को आईएएनएस को बताया कि इस बारे में विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि नायकू अपने गांवा आने वाला है, और उसके बाद राष्ट्रीय रायफल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और स्थानीय पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) तत्परता दिखाते हुए गांव के प्रवेश और निकास मार्ग को सील कर दिया।

सूत्रों ने कहा, “बगल के गुलजारपोरा गांवा को भी घेर लिया गया और तलाशी अभियान चलाया गया।”

आठ जुलाई, 2016 को अनंतनाग जिले के कोकरनाग इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में पोस्टर बॉय और कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद रियाज नायकू ने हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर के रूप में कमान संभाली थी।

नायकू के सिर पर 12 लाख रुपये का इनाम था।

नायकू स्थानीय पुलिसकर्मियों की हत्याएं करवाता था, ताकि वे डर के मारे आतंकरोधी अभियानों में हिस्सा न लें। उसके भय का ही परिणाम था कि पुलिसकर्मियों को खासतौर से दक्षिण कश्मीर के जिलों में अपने घरों को न जाने की सलाह दी गई थी।

आतंकवादी बनने से पहले नायकू ने एक स्थानीय स्कूल में गणित शिक्षक के रूप में काम किया था। 33 साल की उम्र में बंदूक उठाने से पहले उसे गुलाबों की पेंटिंग करने के शौक के लिए जाना जाता था।

सुरक्षा बल के लोग हिजबुल को एकजुट रखने के लिए नायकू को जिम्मेदार मानते थे, जबकि जाकिर मूसा के हिजबुल से अलग होकर अपना खुद का समूह बना लेने के बाद हिजबुल के खत्म होने की संभावना बन गई थी।

मूसा ने 2017 में हिजबुल से अलग होकर अपना खुद का समूह बनाया, जिसका नाम अंसार गजावतुल हिंद था, जो अल-कायदा का भारतीय सहयोगी होने का दावा करता था।

लेकिन 23 मई, 2019 को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में त्राल तहसील के डडसरा इलाके में मूसा को मार गिराया गया था। (एजेंसी)

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