vaecharik kranti ka sutrpat karta brhamrishi samaj

समाजद्रष्टा सह स्वतंत्र राजनैतिक विश्लेषक एवं ब्रह्मऋषि चिंतक  ” राजीव कुमार ”  की प्रस्तुति

ब्रह्मऋषियों का इतिहास हमेशा क्रांतिकारियों का रहा है और वे हमेशा किसी न किसी क्रांति के जनक और प्रणेता रहे हैं ।स्वामी सहजानंद सरस्वती से लेकर संत बिनोवा भावे और श्री कृष्ण सिंह इत्यादि अनेकों ऐसे नाम एवं ब्रह्मऋषि चेहरे रहे जिन्होंने अलग अलग सामाजिक क्रांति का अपने अपने समय में आगाज किया और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया ।

लेकिन 1990 के उपरान्त ब्रह्मऋषि समाज के क्रन्तिकारी एवं सच्चे चिंतक लोगों के अचानक राजनीति एवं समाज की मुख्यधारा से अलग हो जाने के कारण ये समाज सुषुप्तावस्था में चला गया और नतीजा सम्पूर्ण देश एवं  समाज दिशाविहीन हो गया और विश्व के अन्य देशों के विकास की तुलना में हम काफी पीछे छूट गए ।

बात 1990 से शुरू करते हैं जब सम्पूर्ण विश्व GATT समझौते के तहत अर्थव्यवस्था की नई बुलंदियों को छूने की ओर अग्रसर हो रहा था । विश्व व्यापार के इस समझौते से जहाँ हरेक देश तेजी से तरक्की करने की तैयारी में थे वहीँ भारत जैसे देश में राजनीति के एक नए एवं काला अध्याय की शुरुआत करने की तैयारी चल रही थी कुछ क्षेत्रीय राजनेताओं के द्वारा उनके निजी हित के लिए । एक तरफ जहाँ समूचा विश्व वाणिज्य एवं व्यापार की नई बुलन्दियाँ छूने की उड़ान भरने के लिए फरफरा रहा था तो दूसरी तरफ भारत में अर्थव्यवस्था को धीमा और चौपट करने वाली , प्रतिभा की हत्या करने वाली विशुद्ध जातिगत राजनीति की शुरुआत मंडल कमिशन की सिफारिशों को लागू करके की गई । ये उसी मंडल की राजनीति की आधारशिला का तात्कालिक असर था जिसने भारत सरकार को सोना तक गिरवी रखने को मजबूर कर दिया था क्योंकि जातिगत राजनीति के चक्कर में प्रतिभा की कमी की वजह से हमारी अर्थनीति इतनी कमजोर हो गई थी कि हम गर्त में जा चूके थे ।
ये उसी घटिया मंडल की राजनीति का परिणाम रहा कि विगत 27 सालों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में आये उफान के    बावजूद हम अपने पड़ोसी देश चीन के सामानांतर भी नहीं विकास कर सके और आज भी हमारी अर्थव्यवस्था अधिकांशतः आयात पर ही आधारित है ।

सबसे ज्यादा इस घटिया राजनीति का जो  वर्ग शिकार हुआ वो प्रतिभाशाली वर्ग था जिसके पर ( पंख ) मंडल की जातिगत राजनीति के प्रभाव में इतने ज्यादा क़तर दिए गए ताकि यह वर्ग स्वच्छन्द उड़ान न भर सके और वैश्विक विकास के इस दौर में फड़फड़ाता रह जाए ।

इस घटिया राजनीति के विरोध में कितने ही प्रतिभावान युवा शहीद हो गए जो भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते थे और भारत से गरीबी और बेरोजगारी को पूर्णतया दूर कर सकते थे ।
कुल मिलाकर मंडल बनाम कमंडल के इस दौर में प्रतिभाशाली वर्ग ही सर्वाधिक नुकसान में रहा फिर भी प्रतिभा की हत्या करने वाली जातिगत आरक्षण व्यवस्था खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है और आज भी बदस्तूर जारी है ।

ख़ुशी की बात यह है कि आज एक बार फिर उसी क्रन्तिकारी वर्ग ब्रह्मऋषि समाज के युवा अचानक सुषुप्तावस्था से जागृतावस्था में आ चुके हैं और इस जातीय आरक्षण रुपी प्रतिभा की हत्या करने वाली कुव्यवस्था के खिलाफ आंदोलन का शंखनाद कर दिया है । इन ब्रह्मऋषि युवाओं की माँग बिलकुल साफ है कि या तो आरक्षण बिल्कुल ख़त्म होना चाहिए या देना भी है तो आर्थिक रूप से पिछडों को मिलना चाहिए ताकि गरीबों का वास्तविक उत्थान हो और देश से गरीबी ख़त्म करने का हमारा संकल्प भी पूरा हो ।

कुलमिलाकर ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि एक नई वैचारिक एवं सामाजिक क्रांति का आगाज युवा ब्रह्मऋषि समाज के द्वारा हो चुका है जो समूचे देश और विश्व में परिवर्तन एवं तरक्की की एक नई गाथा लिखेगा और भारत से गरीबी दूर करने वाला एक क्रन्तिकारी कदम साबित होगा और युवा ब्रह्मऋषि समाज इस सामाजिक एवं वैचारिक क्रांति का सिरमौर कहलायेगा । (
राजीव कुमार, ब्रह्मऋषि चिंतक )