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मुजफ्फरपुर. दिल में देश-समाज के लिए कुछ करने की तमन्ना हो तो असंभव कुछ भी नहीं. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है भूमिपुत्र डॉ. यज्ञानंद प्रसाद सिंह ने. वे लंबे समय से अमेरिका में रहते हैं लेकिन उनका हृदय अपनी माटी के लिए ही धड़कता रहता है. यही वजह है कि वे हर साल कुछ वक़्त के लिए मुजफ्फरपुर(बिहार) स्थित अपने पुश्तैनी गाँव रोहुआ आते हैं और गाँव-समाज के बीच अपना समय बिताते हैं.

बहरहाल इसी आने-जाने के क्रम में उन्होंने ये एहसास हुआ कि गाँव में पढ़ाई-लिखाई का माहौल कमता जा रहा है. गाँव के युवाओं का रूझान नकरात्मक चीजों की तरफ ज्यादा बढ़ रहा है. इसलिए उन्होंने महसूस किया कि गाँव-समाज का माहौल बदलने के लिए एक ऐसी जगह होनी चाहिए जहाँ पढाई-लिखाई का माहौल हो, इसके लिए पुस्तकालय से बेहतर और क्या हो सकता था. बस फिर क्या था उन्होंने गाँव में एक पुस्तकालय खोलने का निर्णय ले लिया और वैद्यनाथ प्रसाद सिंह पुस्तकालय,रोहुआ का श्रीगणेश किया जो शहर से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. गौरतलब है कि वैद्यनाथ प्रसाद सिंह उनके पिता का नाम है और उनकी स्मृति में ही गाँव के पुस्तकालय का नाम रखा गया है.

समाज के असली नायक : शिक्षा से बदलेगी समाज की तस्वीर

वैद्यनाथ प्रसाद सिंह पुस्तकालय की स्थापना 2003 में की गयी थी. स्थापना के 15 साल बाद आज भी ये  पुस्तकालय डॉ. यज्ञानंद के निजी प्रयास से व्यवस्थित तरीके से चल रहा है जिसका फायदा रोहुआ और आस-पास के कई गाँव के युवा व सुधिजन उठा रहे हैं. यहाँ साहित्य,संस्कृति और कला पर विविध किताबें हैं. उसके अलावा प्रतियोगिता परीक्षा के लिए मासिक पत्रिकाएं भी मंगवाई जाती है जिसका लाभ वहां के युवाओं को मिल रहा है.

दरअसल डॉ. यज्ञानंद जैसे लोग ही समाज के असली नायक हैं जो दूर प्रदेश में रहकर भी मिटटी की खुशबू को नहीं भूलते और कुछ ऐसा करते हैं जिससे देश-समाज का वास्तव में भला हो. समाज के लोगों को इनसे प्रेरणा लेने की जरुरत है.

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