ब्रह्मऋषि चिंतक राजीव कुमार की नजरों में जाते हुए वर्ष 2017 की कुछ खास बातें :
कैसे 2017 वर्ष बीत गया ये हमलोगों को पता भी नहीं चला । जाते जाते इस वर्ष 2017 ने कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन के संकेत दिए ।जहाँ एक तरफ इस साल के शुरुआत में उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनाव ने किसानों के एकजुट होकर वोट करने और अपनी माँग को मनवाने हेतु चुनाव में अपनी माँग पर आधारित एकता दिखाई और नतीजा यह हुआ कि भाजपा जैसी शुद्ध व्यवसाइयों और उद्योगपतियों को समर्थित पार्टी को उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने हेतु किसानों की कर्ज माफी की घोषणा चुनाव से पहले करनी पड़ी वहीँ कांग्रेस ने भी पंजाब चुनाव में किसानों के कर्जमाफी की बात कहकर उनकी सहानुभूति जमकर बटोरी । साल के अंत में भी ये सिलसिला जारी रहा और गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने किसानों की कर्जमाफी की बात कहकर उनकी सहानुभूति जमकर बटोरी और सरकार बनाने के करीब आकर उससे वंचित रह गए ।
कुलमिलाकर ये साल 2017 किसानों का साल रहा जिसमें सभी राजनीतिक दलों ने किसानों को रिझाने और उनकी दुखती रगों पर हाथ फेरकर उनकी सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया । इसलिए ये वर्ष भारतीय राजनीति के दौर में किसानों के वोट की महत्ता दर्शाने वाला साल रहा ।इसके अलावा गुजरात के चुनाव में जिस प्रकार से NOTA को बढ़ चढ़ कर वोट मिला उसने भी भारतीय लोकतंत्र के व्यापक चुनाव सुधार की ओर बढ़ने का संकेत दिया जो एक अभूतपूर्व कदम है और जिसे भारतीय लोकतंत्र के सुचिता की ओर बढ़ने हेतु बाध्य करने वाला क्रन्तिकारी पहल भी माना जाएगा । रोजी रोजगार के मामले में ये वर्ष 2017 एक दम से हर क्षेत्र में असफल रहा और रोजगार के बहुत ही कम अवसर सृजित हुए ।
चलते – चलते बात ब्रम्हर्षि समाज की करें तो एक बात समझ में खुलकर सामने आई कि सोशल मीडिया पर इस साल ब्रम्हर्षि समाज का रुझान जबरदस्त बढ़ा और लोगों में जमकर इस तरफ आकर्षण देखने को मिला । युवाओं ने जहाँ सामाजिक पहल के माध्यम से जमीन पर कुछ मानवीय मदद की पहल जैसे कृत्य कर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई , वहीं बुजुर्गों में चंद सच्चे महामानवों को अपवाद स्वरूप छोड़कर बाकि लोगों ने अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने और उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने में युवाओं को झूठ – मूठ का रिझाने और उन्हें गुमराह करनेे में सोशल मीडिया का बखूबी प्रयोग किया ।
चंद इन अति महत्वाकांक्षी बुजुर्गों के इस सोशल मीडिया पर बढ़े प्रवाह और उनकी निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने युवाओं को दिग्भ्रमित करने का कार्य किया जो कि सचेत करने वाला संकेत है और किसी भी दृष्टि से अच्छा नहीं कहा जा सकता ।हाँ अलबत्ता कुछ महामानव बुजुर्गों ने जरूर 2017 वर्ष में सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी सामाजिक महत्ता और मानवीय उत्तरदायित्व का बखूबी निर्वहन किया और युवाओं का मार्गदर्शन भी बढ़ – चढ़ के किया जो उनके लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा और जिसके लिए युवा भी सदैव उनके आभारी रहेंगे ।मिला-जुलाकर ये कहें कि ये वर्ष सोशल मीडिया की तरफ ब्रम्हर्षि समाज के बढ़ते रुझान वाला साल रहा तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ।




