manoj sinha aur modi in gamcha

मनोज सिन्हा जैसा ज़मीनी नेता और कहाँ मिलेगा?

manoj sinha
राजनीति जब फरेब का धंधा बन गया है और नेता ज़मीन से कट गए हैं तब मनोज सिन्हा जैसे नेता उम्मीद जगाते हैं. दरअसल हम उनकी तारीफ़ में कसीदे नहीं पढ़ रहे, बल्कि हकीकत बयान कर रहे हैं. उनके धुर विरोधी भी इससे इंकार नहीं करते. तभी तो खुद पीएम मोदी भी उनके मुरीद हैं. कहते हैं कि संघर्ष के दिनों में दोनों ने खिचड़ी-चोखा साथ-साथ खूब खायी है. खिचड़ी-चोखा की वही दोस्ती अब भी बरकरार है. खिचड़ी-चोखा सादगी का प्रतीक है जो मनोज सिन्हा के व्यक्तिव से मेल खाता है. आमतौर पर राजनीति में आजकल हर काम मीडिया को दिखाने के लिए किया जाता है लेकिन मनोज सिन्हा जैसे नेता ऐसा कोई भी दिखावा नहीं करते. वे पहले जैसे थे, केन्द्रीय मंत्री बनने के बाद भी ठीक वैसे ही हैं. उनके पास रेल मंत्रालय और दूरसंचार जैसे भारी-भरकम मंत्रालय का कार्यभार है और वे चाहते तो पूरी तरह से कॉर्पोरेट होकर कंपनियों के कॉरिडोर और मंत्रालय में ही दीखते. लेकिन ऐसा नहीं है. मंत्रालय का काम बखूबी निभाने के अलावा वे अपने लोकसभा क्षेत्र गाजीपुर में भी लगातार दीखते रहते हैं. कभी सामान्य लोगों के साथ ज़मीन पर बैठकर भोज खाते हैं तो कभी गमछे से सिर को बांधकर भरी दोपहरी में सभा को संबोधित करते हैं. इस मामले में उनका अंदाज़ ही निराला है. धोती-कुर्ता और गमछे में वे खूब फबते हैं और मुंह से निकल पड़ता है – धोती,कुर्ता और गमछे वाले इस ज़मीनी नेता के क्या कहने? देखिए कुछ तस्वीरें –
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