पत्रकारिता – मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और इस स्तंभ को मजबूती प्रदान कर रहे हैं भू-समाज के लोग. अपनी अदभूत प्रतिभा और परिश्रमी स्वभाव की वजह से मीडिया में भूमिहार समुदाय की अच्छी उपस्थिति है. बड़े पदों पर उनका दबदबा है. यह स्थिति प्रिंट,इलेक्ट्रौनिक और ऑनलाइन तीनों माध्यमों में है.
एक तरफ उदय शंकर जैसे शख्स हैं जिनकी तरक्की मीडिया इंडस्ट्री में एक मिसाल मानी जाती है.उदय शंकर वर्तमान में स्टार इंडिया के प्रमुख है और यह सफर उन्होंने बड़ी तेजी से तय किया है. टाइम्स ऑफ इंडिया,पटना से बतौर पत्रकार अपना सफर शुरू करने वाले उदय शंकर स्टार इंडिया तक पहुँचते-पहुँचते मैनजमेंट और कॉरपोरेट जगत के माहिर खिलाड़ी के तौर पर उभर कर सामने आए. मीडिया इंडस्ट्री में उनकी जैसी तरक्की शायद ही किसी की हुई हो.
दूसरी तरफ न्यूज़ चैनलों में ठीक-ठाक अनुपात में ऐसे संपादक हैं जो जाति से भूमिहार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. सतीश के सिंह (न्यूज़24), अजीत अंजुम (मैनेजिंग एडिटर,इंडिया टीवी), एन.के.सिंह (महासचिव,ब्रॉडकास्ट एडिटर एसोसियेशन), शैलेश (पूर्व सीईओ,न्यूज़ नेशन), उपेन्द्र राय (एडिटर-इन-चीफ,तहलका), अजय कुमार (मशहूर एंकर,न्यूज़ नेशन) आदि ऐसे कई नाम हैं जो मीडिया में बड़े पदों पर बने हुए हैं. इसके अलावा भी ढेरों भूमिहार नाम है जो मीडिया में उच्च पदों पर आसीन है और अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं.
खास बात है कि इन सबने अपने पद के साथ न्याय करते हुए कभी भी जाति और पेशे का घालमेल नहीं किया. आपको याद होगा कि जब रणवीर सेना को लेकर भी बात उठी तो भूमिहारों के खिलाफ मीडिया में खूब नकरात्मक ख़बरें चली और इसे चलाने वाले ऐसे संपादक भी थे जो जाति से भूमिहार थे. लेकिन ये उनका एडिटोरियल स्टैंड था और उन्होंने ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वाहन किया. धर्म और कर्म के अंतर को बनाये रखा. शायद इसीलिए भू-समाज को ‘मेटल’ कहते हैं.




