पटना. हैबसपुर नरसंहार कांड के 28 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में आज बरी कर दिया गया. लगभग बीस वर्ष पूर्व हुए इस बहुचर्चित मामले में एससी एसटी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने स्पीडी ट्रायल करते हुए आज ये फैसला दिया. घटना 23 मार्च 1997 को रनिया तालाब थाना क्षेत्र में हुई थी जिसमें 10 दलितों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. विशेष कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए कांड के आरोपितों रामायण तिवारी, शिवानंद शर्मा, नवल सिंह, भूतल सरदार, गजेन्द्र सिंह उर्फ महेश्वरी समेत 28 आरोपितों को नरसंहार कांड से बरी कर दिया। यूनीवार्ता की रिपोर्ट के मुताबिक़ मार्क्सवादी पार्टी – माले ने फैसले को निराशाजनक बताया है. हैबसपुर नरसंहार कांड पर एक नज़र –
राघोपुर कांड के प्रतिशोध में दिया था घटना को अंजाम : हैबसपुर कांड से कुछ दिन पूर्व जिले के ही राघोपुर में ऊंची जाति के 6 लोगों की हत्या कर दी गई थी थी। माना जाता है कि इसी के प्रतिशोध में रणवीर सेना ने हैबसपुर की घटना को अंजाम दिया था। घटना में करीब मांझी, सुरेश मांझी, किशुन मांझी, भोपाली मांझी, शकुनी मांझी, राजकुमार मांझी समेत 10 दलितों की हत्या कर दी गई थी।
मात्र 18 गवाह किए पेश : इस मामले में अभियोजन पक्ष ने मात्र 18 गवाहों को पेश किया था। सभी अभियोजन गवाहों ने कहा कि लंगड़ सिंह और भोजपुरिया ने गोली मार कर दलितों का नरसंहार किया था। लेकिन किसी भी गवाह ने कोर्ट में 28 आरोपितों का नाम नहीं लिया।
चार्जशीट हुई थी दायर : कांड के 8 आरोपितों की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने इस कांड में 13 आरोपितों को फरार दिखाते हुए 36 पर चार्जशीट दायर की थी। लंबे मुकदमे के बाद कोर्ट ने अभियुक्तों के खिलाफ साक्ष्य नहीं पाए जाने पर उन्हें बरी कर दिया।
कुएं पर लिख दिया था संगठन का नाम : आरोप है कि राघोपुर कांड का बदला लेने के लिए दस दलितों की हत्या की गई थी। कांड को अंजाम देने के बाद रणवीर सेना के तथाकथित सदस्यों ने गांव छोड़ने से पहले सूखे कुएं के घेरे पर खून से संगठन का नाम लिख दिया था।
उस दौर में जल उठा था मध्य बिहार : 90 के दशक में हैबसपुर की तरह मध्य बिहार में नरसंहार की कई घटनाएं हुईं थीं। पटना जिला के अलावा मगध के जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद और शाहाबाद के भोजपुर में नरसंहारों का लंबा दौर चला था। इस दौरान बाथे, बथानी टोला, नाढ़ी, इकवारी, सेनारी, राघोपुर, रामपुर चौरम, मियांपुर जैसे कई कांड हुए थे। प्रतिबंधित नक्सली संगठन और रणवीर सेना के बीच खूनी संघर्ष में सैकड़ों लोगों की जानें गईं थीं।





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