RAJIV KUMAR BHUMIHAR RAJNITI

ब्रह्मऋषि वेदना से ओतप्रोत ब्रह्मऋषि राजनेताओं के राजनैतिक पतन पर ब्रह्मऋषि चिंतक राजीव कुमार की व्यक्तिगत शोध पर आधारित प्रस्तुति

हाल ही के वर्षों में ब्रह्मऋषि समाज की राजनैतिक हिस्सेदारी में आये तीव्र ह्रास पर जमकर हाय तौबा मचा हुआ है । चारों तरफ राजनैतिक सम्मलेन आयोजित किये जा रहे हैं कि किस प्रकार समाज को एकमत किया जाए और बड़ा वोट बैंक बनाया जाए । लेकिन शायद इस बात को लेकर कोई जनमत संग्रह करने का प्रयास नहीं हो रहा है कि समाज की मूलभूत समस्याएँ हैं क्या और इनका समाधान क्या है । सरकार या कोई agency भी कोई योजना को सतह पर लाने से पहले उसके ऊपर एक सर्वे करती है ताकि उस योजना को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके । लेकिन अपार बुद्धिजीवियों के समूह ब्रह्मऋषि समाज में सामाजिक समस्याओं और उसके समाधान हेतु आवश्यक चिंतन ही गायब हो चुका है और नतीजा तीव्र राजनैतिक पतन । 1990 के उपरांत आये इस तीव्र राजनैतिक पतन के बहुत से कारण हैं उनमें से प्रमुख जो कारण हैं वो निम्नलिखित हैं :

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1) समाज की अधिकांश आबादी के कृषि पर आश्रित होने के बावजूद उसको अधिक से अधिक रोजगारपरक और लाभप्रद बनाने हेतु सामाजिक और राजनैतिक प्रयास में कमी ।

2) समाज में गैरराजनीतिक एवं सांस्कृतिक मंच का बिलकुल विलुप्त हो जाना

3) सच्चे सामाजिक चिंतकों की बजाए गुंडे ,दलाल , अपराधी प्रवृति के लोगों को राजनैतिक तवज्जो देना और उनका राजनैतिक प्रादुर्भाव होना ।

4) गुंडे मवालियों के राजनैतिक प्रादुर्भाव के कारण विगत वर्षों में बहुतेरे प्रबुद्ध एवं सच्चे पुरोधा लोगों को नुकसान पहुँचाया गया और नतीजतन उन लोगों का समाज के प्रति चिंतन और रुझान समाप्त हो गया और फलस्वरूप समाज का ह्रास हर क्षेत्र में हुआ ।

5) युवाओं को शैक्षणिक और व्यावसायिक रूप से विकसित करने के प्रयास को विराम लगा दिया गया और उनको सामाजिक प्रोत्साहन कम मिला जिसकी वजह से भी समाज दिशाविहीन हो गया और समाज में एक प्रकार से उदासी छा गई ।

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इन सब कारणों के अलावा और भी बहुतेरे कारक रहे जिसने समाज की दशा और दिशा पर प्रतिकूल प्रभाव डाला और नतीजा ऐसा हुआ कि लोग एक दूसरे से कन्नी काटने लगे और दूरी इस कदर बढ़ी कि आपसी मदद की भावना ही समाप्त हो गई । लोग खुराफाती बातों पर अधिक ध्यान देने लगे और ये समाज चेतना शून्य हो गया ।

आज स्थिति यह है कि एक भूमिहार के साथ अन्याय होता रहता है एवं उसका नुकसान होता रहता है और लोग चुपचाप देखते रहते हैं और पीठ पीछे ताली भी बजाते हैं और उसकी तकलीफ से खुश होते हैं । बड़ी ही शर्मनाक स्थिति हो चली है इस समाज की और अजीब विडम्बना है कि कोई इसपर सोंच नहीं रहा ।अगर यही स्थिति बनी रही और इसपर कोइ त्वरित सुधार नहीं किया गया तो सामाजिक रूप से शून्यता की ओर बढ़ चुका यह समाज बहुत जल्द राजनैतिक रूप से भी शून्य हो जाएगा ।

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अतः जो लोग यह ख्वाब देख रहे हैं कि 10 प्रतिशत की आबादी वाले यादव समाज की बिहार विधानसभा में राजनैतिक हिस्सेदारी 80 सीट ( लगभग ) के समानुपात में 7.5 -8 % की आबादी वाले भूमिहार समाज की राजनैतिक हिस्सेदारी होनी चाहिए , उनको पहले सामाजिक खामियों और कुरीतियों के खात्मे हेतु सघन प्रयास करना चाहिए और अपने समाज के चहूँओर उत्थान हेतु प्रयास करना चाहिए , तभी उनका प्रयास सफल होगा ।

इसलिए राजनैतिक चेतना जागृति से पहले सामाजिक चेतना जागृति  लाना बहुत जरूरी है और वैसे खुराफाती तत्वों पर पूर्ण विराम लगाने की तत्काल आवश्यकता है जो गैरों से मिलकर या खुद से  अपने समाज और अपने लोगों का ही नुकसान करते रहते हैं ।

इसलिए जबतक सामाजिक जागृति और चेतना पर बल नहीं दिया जाएगा तबतक राजनैतिक चेतना और एकता की बात सफलीभूत नहीं हो सकती । (राजीव कुमार, ब्रह्मऋषि चिंतक )

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