पत्रकारिता के कुछ उसूल होते हैं. उसमें से एक प्रमुख उसूल होता है कि ख़बरों को जातिगत रंग से बचाना. लेकिन वर्तमान समय में पत्रकारिता के ये सारे सिद्धांत जैसे भूला दिए गए हैं और रोज पीत पत्रकारिता का नमूना दिखाई दे ही जाता है. 10जून,2017 को पीत पत्रकारिता का ऐसा ही नमूना आजतक और उसके सहयोगी साईट लल्लनटॉप पर भी दिखाई पड़ा. उस दिन दोनों वेबसाईट पर दो शीर्षकों से खबर पोस्ट की गयी. खबर का शीर्षक था – 
आजतक : बिहारः कबड्डी की नेशनल प्लेयर को दबंगों ने दी बलात्कार की धमकी 
http://aajtak.intoday.in/crime/story/bihar-kabaddi-wrestling-women-player-threat-rape-1-934656.html 
लल्लनटॉप : जिस लड़की को रेप की धमकी दे रहे हैं, खेल में हराकर दिखाइए 
http://www.thelallantop.com/news/backward-caste-girl-threatened-of-rape-by-upper-caste-men-in-bihar/ 
खबर का सार था कि एक कबड्डी प्लेयर को धमकी मिली थी जिसकी शिकायत पुलिस में उस खिलाड़ी ने दर्ज भी करवायी. लेकिन पत्रकारों ने इसमें नेताओं की तरह जाति ढूंढी और खिलाड़ी को यादव और दबंगों को भूमिहार जाति के रंग में रंग दिया. जबकि खबर में जाति का एंगल होना ही नहीं चाहिए थे. सीधे-सीधे खबर होनी चाहिए था. लेकिन जब जाति का चश्मा लगा हो तो खबर भी जाति के रंग में रंगती ही है.

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