सेनारी नरसंहार मामले में जब फैसला आया तब उसका असर जहानाबाद से लेकर दिल्ली तक दिखा. वैसे दिखना भी चाहिए था क्योंकि दस को फांसी की सजा और तीन को आजीवन कोई छोटी सजा नहीं है.एक जघन्य अपराध की कठोर सजा. ज़ी पुरवैया की एक रिपोर्ट –
ज़मीन से ज़मीन की बात – भू-मंत्र