भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लोकसभा चुनाव के पहले तक देश में उतने लोग नहीं जानते थे. हां उनके वामपंथी विरोधी उनकी ताकत से बखूबी वाकिफ थे और नाम सुनते ही नाक-भौं सिकोड़ने लगते थे.
ख़ैर लोकसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से जब पीएम मोदी की उम्मीदवारी की घोषणा हुई,तब शाह उनकी तरफ के सबसे बड़े सिपहसालार बनकर उभरे,जिनकी रणनीति की बदौलत उत्तरप्रदेश में तमाम दूसरी पार्टियों का डिब्बा गोल हो गया. उन्होंने ऐसी रणनीति बनाई कि विपक्ष चारो खाने चित्त. इसलिए उनके विरोधी भी उन्हें तत्कालीन भाजपा का चाणक्य कहते हैं और पीएम मोदी को भी उनपर अटूट विश्वास है.
लेकिन अमित शाह को चाणक्य नीति पर विश्वास है और अपनी सफलता का श्रेय वे आचार्य चाणक्य को ही देते हैं. वे आचार्य चाणक्य के बड़े समर्थक और अनुयायी हैं और उन्हें ही अपना आदर्श मानते हैं. उनके घर में आचार्य चाणक्य की तस्वीर लगी हुई है. लखनऊ में आयोजित ‘हिन्दुस्तान शिखर समागम’ में उन्होंने हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर के साथ बातचीत में खुद ही इस बात को स्वीकार किया. चाणक्य से संबंधित दो प्रश्न शशि शेखर ने पूछा, जिसका जवाब अमित शाह ने कुछ इस तरह से दिया –

  • आपकी राजनीति के आदर्श चाणक्य हैं? आपके कमरे में चाणक्य की बहुत अच्छी फोटो लगी है? क्या आप चाणक्य के सिद्धांतों में यकीन करते हैं? 

मैं ही नहीं, काफी लोग यकीन करते हैं। मैं तो करता ही हूं।  

  • जहां भी आप चुनाव लड़ते हैं, वहां दूसरी पार्टियां टूटने लगती हैं? क्या यह चाणक्य का असर है? 

मैं कोई ‘डिफेंसिव’ जवाब नहीं दूंगा। किसी दूसरे की पार्टी को संभालने का मेरा दायित्व नहीं है। सबको अपनी-अपनी पार्टियां संभालनी चाहिए। मुझ पर मेरी पार्टी की जिम्मेदारी है।

ज़मीन से ज़मीन की बात – भू-मंत्र