कृष्णानंद राय को सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो कातिल मुख्तार अंसारी की राजनीतिक हैसियत का खात्मा कीजिये :
आज कृष्णानंद राय की पुण्यतिथि है. मुझे नहीं लगता कि भू-समाज को उनका परिचय देने की जरूरत है. पूरा उत्तरप्रदेश उनके साहस और जीवटता से परिचित है कि कैसे उन्होंने अपनी संगठनात्मक शक्ति की बदौलत मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में खौफ का पर्याय बन चुके मुख्तार अंसारी और उसके भाइयों को नाको चने चबवा दिया. उनकी बादशाहत को चुनौती देते हुए दशकों की राजनीति पर पानी फेरते हुए अंसारी के भाई को चुनाव में परास्त किया और उन सबके घमंड के तार-तार कर दिया. कहते हैं कि उनपर गोलियों कि बौछार करते हुए हत्यारे चिल्ला रहे थे – “मारो इसे अफजल भाई, इसने मुख्तार भाई को बहुत तंग कर रखा है.” इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुख्तार अंसारी और उसके गुर्गे कृष्णानंद राय से किस कदर खौफ़जदा थे. इसलिए जब किसी भी तरह से वे पार न पा सके तो उनकी कायराना हत्या करवा दी.
लेकिन अब वक्त आ गया है जब पूरा भू समाज एकजुट होकर अंसारी बंधुओं से हिसाब चुकता करे. इस गुंडे को उसकी हैसियत दिखाते हुए उसकी राजनैतिक हस्ती को मिटा डाले. कृष्णानंद राय की मौत का यही सबसे बड़ा प्रतिशोध होगा. इसका मौका भी बहुत जल्द मिलने वाला है. अगले साल उत्तरप्रदेश के चुनाव होने वाले हैं और भूमिहार बहुल मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से अपनी राजनैतिक हैसियत बचाने की जद्दोजहद में अंसारी बंधू फिर एड़ी-चोटी एक करेंगे. लेकिन यदि पूरा भू-समाज किसी भी पार्टी के किसी एक भूमिहार प्रत्याशी को एकजुट होकर वोट डाले तो अंसारी बंधुओं की राजनीति में जमानत जब्त हो जायेगी और वही स्वर्गीय कृष्णानंद राय के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. आप पर पूरे देशभर के भू समाज की नज़रें टिकी हुई है, उम्मीद है आप निराश नहीं करेंगे. याद रखियेगा समाज की प्रतिष्ठा की जब बात आए तो व्यक्तिगत अहम और लाभ को दरकिनार कर देना चाहिए. ऐसा करके आपने अपनी पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करते हैं.



