बहुमुखी प्रतिभा के धनी और वर्तमान में भागलपुर के डीआईजी विकास वैभव को फेम इंडिया पत्रिका और एशिया पोस्ट के एक सर्वे में 25 सुपर कॉप्स में शामिल किया गया है. गौरतलब है कि फेम इंडिया समय-समय पर ऐसे सर्वे करवाती रहती है. उसी कड़ी में ये सर्वे भी है. फेम इंडिया की रिपोर्ट –
इंजीनियर बनते-बनते बन गए आपीएस अधिकारी –
2003 बैच के बिहार कैडर के आइपीएस अधिकारी विकास वैभव बिहार के बेगुसराय के रहने वाले हैं। विकास वैभव के पिता इंडियन ऑयल में नौकरी करते थे। विकास की प्रारंभिक शिक्षा बेगुसराय में हुई लेकिन बाद में इनके पिता का तबादला सिंदरी हो गया। विकास 8वीं तक की पढ़ाई सिंदरी में किए, इसके बाद पिता के साथ दिल्ली आ गए। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद इंजिनीयरिंग परीक्षा की तैयारी में जुट गए। मेधावी छात्र होने के कारण विकास को कानपुर आईआईटी में एडमिशन मिल गया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते समय विकास के मन में बारबार एक सवाल आता था कि इंजीनियर बनके पैसे तो कमा लूंगा लेकिन समाज और देश के लिए भी कुछ योगदान होना चाहिए। यही छटपटाहाट विकास को सिविल सेवा की ओर आकर्षित किया। विकास जब इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे तभी से वो सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गये। अपने पहले प्रयास में ही विकास सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईपीएस अधिकारी बन गए।
विकास वैभव चौक –
विकास की पहली पोस्टिंग बहुत ही संवेदनशील इलाका पटनासिटी में हुई। उस समय पटनासिटी में अपहरण की घटनाएं आम बात थी। विकास वैभव ने कमान संभलते ही अपराधियों पर नकेल कसने शुरु कर दिए जिससे आपराधिक घटनाओं में भारी कमी आ गयी। इसके बाद विकास वैभव का तबादला बगहा हो गया। बगहा उस समय आपराधिक गतिविधियों का अड्डा बन चुका था और चंपारण का चंबल कहा जाता था। कुछ इलाके तो ऐसे थे कि सुबह या दोपहर में भी उधर से गुजरने में आम आदमी को डर लगता था। बगहा का एक चौराहा तो इतना बदनाम था कि उसके नाम से ही लोग डर जाते थे, लेकिन कड़क तेज-तर्रार ऑफिसर के आते ही यहां की स्थिति सुधरने लगी। आज ये इलाका लोगो से गुलजार है। यह विकास के व्यक्तित्व का करिश्मा ही है कि चंपारण के समरकोला गांव के इस चौराहे का नाम सितंबर 2017 में विकास वैभव के नाम पर रखा गया है।
जनता के लिए तत्पर –
विकास वैभव एक आईपीएस अधिकारी के तौर पर जहां भी रहे है जनता के लिए आम से हटकर कुछ खास काम जरुर किए है। 2008 में रोहतास में एसपी के तौर पर जब उनकी पोस्टिंग हुई उस समय रोहतास आतंकवाद से जूझ रहा था। विकास वहां की समस्या को समझने के लिए गांव में घूम-घूमकर हर किसी से समस्या को जानने की कोशिश किए। लोगो को उनके सुनहरे अतीत की कहानियां बता उनके अंतर्मन को जगाया कि आपका अतीत इतना सुनहरा था अब आपलोग ऐसा काम क्यों कर रहे हैं। बेवजह संदेह के आधार पर लोगो की गिरफ्तारी पर रोक लगाए।पुलिस कम्यूनिंटिंग के माध्यम से पुलिस और जनता के बीच रिश्तों को मधुर बनाया। 2008 से 2011तक विकास रोहतास में रहे और वहां पनप रहे माओवादी आतंकवाद को काफी हद तक समाप्त कर दिए। जनता में उनके प्रति लगाव ही है कि जब रोहतास पुलिस का बेवसाइट लॉंच हुआ तो इसके लिए विकास वैभव को बुलाया गया। वर्तमान में विकास भागलपुर रेंज के डीआईजी हैं।
बाहुबली अनंत सिंह को गिरफ्तार किया –
2015 में पटना के एसएसपी के तौर पर पदभार ग्रहण करने के एक दिन बाद ही बाहुबली विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार कर विकास वैभव सुर्खियों में आ गए थे। पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहरों से विकास वैभव को खास लगाव है। विकास सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। उन्होंने साइलेंट पेज नाम से अपना ब्लॉग बनाया है जिसमे वो देश के ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ी बातों को लिखते हैं। फिलहाल वो सिंधुघाटी सभ्यता पर काम कर रहे हैं। यह विकास वैभव की काबिलियत है कि मुंबई ब्लास्ट के बाद जब एनआईए का गठन हुआ था, उसमे ट्रेनिंग के लिए सेलेक्ट हुए पुलिस अधिकारियों में ये भी शामिल थे। आतंकवादी यासिन भटकल की चार्जशीट भी विकास वैभव ने ही फाइल की थी। पढने-पढ़ाने के शौकीन विकास वैभव बतौर गेस्ट लेक्चरार और एक्सपर्ट चाणक्या लॉ इंस्टिट्यूट में स्टूडेंट्स को टेररिज्म सब्जेक्ट पढ़ाते हैं। (फेम इंडिया से साभार)




