आदित्यपुर (जमशेदपुर)। डॉ. ममता राय टॉपर थी। उनकी उम्र महज 27 साल की थी। वे दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) अस्पताल में काम कर रही थीं और साथ में पीजी भी। एक कांफ्रेंस अटेंड करने कोच्चि गयी और वही होटल के कमरे में उनकी संदिग्ध लाश मिली। उसने परिजनों को अंतिम मैसेज भेजा था, जिसमें लिखा है… ‘सॉरी पापा। सॉरी भइया। मैं डिप्रेशन हूं इसलिए जिंदगी से क्विट कर रही हूं।’ इसी मोबाइल मैसेज के आधार पर उसे आत्महत्या का नाम दिया गया। लेकिन क्या ये वाकई में आत्महत्या थी? डॉ. ममता के पिता अरविंद कुमार राय इसे आत्महत्या नहीं मानते। उन्होंने रिपोर्ट में लिखा है कि –
‘वह स्कूल टॉपर थी। एम्स, दिल्ली की गोल्ड मेडलिस्ट है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्विज और कॉन्फ्रेंस की विजेता बनी। वह ऐसे काम नहीं कर सकती। उसे एम्स के डॉ. संजय, दोस्त आलोक और नेहा ने प्रताड़ित किया। धमकी दी और षड्यंत्र रचकर हत्या कर दी। डॉ. संजय ने ममता के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था। ममता ने मना कर दिया। डॉ. संजय उससे मारपीट करता था। धमकी देता था कि किसी को बताया तो पूरे परिवार को खत्म कर देगा। 02 जनवरी को भी उसने ममता से मारपीट की थी। वह मुझसे कोई भी बात नहीं छिपाती थी, लेकिन धमकी के कारण उसने नहीं बताया। 19 जनवरी को मुझसे बात हुई थी। उसने कहा था, कॉन्फ्रेंस से निकलकर बात करती हूं। सुबह 10.30 बजे दोस्त रिमी को फोन किया और रोते हुए बोली की उसे कोच्चि अभी छोड़ना है। रिनी ने पटना का टिकट लेकर आ जाने को कहा। मैंने सुबह 11 और दोपहर 12 बजे बात करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। कोच्चि से जाने की सूचना पर डॉ. संजय ने उससे सुसाइड नोट लिखवाया और पंखे से लटककर जान देने पर विवश किया। मैंने सीबीआई जांच की मांग की है।’
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