समाज खासकर हम सभी के भूमिहार समाज की बात करे तोह आज हम सभी के पतन समाजिक और राजनीतिक तौर पर हो जाने के कारण हम सभी खुद है।

देश मे सबसे बुद्धिजीवी, मेहनती, हज़ारो आईएएस आईपीएस, डॉक्टर्स, बड़े बड़े वकील, जज, इत्यादि होने पर नही हम लोग समाजिक तौर पर विकास नही कर पाए।
इसका जीत जागता उदाहरण है राजनीतिक तौर पर हमेशा से हमे एक विकल्प मात्र देखा गया है।

संख्या बल है भी नही और न ही एकजूट हिट भी नही हम। इसकी बानगी देखिए कि जिन जिन सीट पर ज्यादा भूमिहारो की संख्या है उनमें ज्यादातर उम्मीदवार अलग अलग पार्टी से भूमिहार ही होते है। समाज एक जुट होकर वोट भी नही देता, विभाजित वोट किसी काम का नही हो पाता।

आज भूमिहार भाई बहन काफी प्रसिद्धि काफी धन अर्जित कर चुके है पूरे देश मे फैले हुए है परन्तु ये सब सिर्फ निजी तौर पर। सामाजिक तौर पर हम काफी पीछे है।

Bhu mantra एक वैचारिक मंच भी है।
ये एक लौ के एक चिंगारी के भाती हम सभी के अंदर ज्वलित हो, हम सभी को एकजुट कर रहा है।
यहां चिकित्सा, law, शादी, रक्तदान, रोजगार, इत्यादि के आपसी निःस्वारत मदद से अनेको लोगो को पिछले सालों से फायदा मिला है। चाहत कही न कही बढ़ी भी है हम सभी मे एक जुट होने की।

मैं बस यही आशा उम्मीद करता हु हम सभी एक जुट होकर एक दूसरे के कदम से कदम मिलाकर चले ताकि दूर तक चल सके। इस देश इस दुनिया मे हम यानी भूमिहार समाज एक होनहार विकसित समाज के तौर पर जाने जाए।

किसी ने सही कहा है।

” अगर तेज़ी से बढ़ना है तोह अकेले चलो।
परन्तु अगर दूर तक बढ़ना है तोह साथ चलो।”

आइए हम सभी दूर तक साथ चले। जय हिंद जय भूमिहार।

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