हम दीपावली में दीया जलाते हैं ताकि हमारा घर खुशियों से जगमगा उठे. लेकिन हमारे घर का दीया जलता रहे इसके लिए बॉर्डर पर भारतीय सेना के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर दुश्मनों से लोहा लेते हैं और शहीद भी होते हैं. ऐसे ही एक शहीद वैशाली जिले के राजीव कुमार राय हैं जिन्होंने सीमा की सुरक्षा करते हँसते-हँसते आपनी जान दे दी और अब पूरे देश और भू-समाज को उनपर नाज है.
शहीद राजीव कुमार राय जम्मू = कश्मीर में तैनात थे और पाकिस्तान की ओर से हुई भीषण गोलीबारी में मारे गए थे. राजीव कुमार राय का पार्थिव शरीर आज उनके गांव वैशाली जिले के महुआ पहुंचा. राजीव का शव पहुंचते ही पूरा गांव गम में डूब गया. चारों ओर शोक की लहर दौड़ गयी. इतना ही नहीं पूरा गांव उमड़कर राजीव के घर पहुंचा और स्थानीय ग्रामीणों के अलावा हजारों लोगों ने भारत-माता की जय के नारे के साथ अपने शहीद जवान को आखिरी विदाई दी.
प्रभात खबर की रिपोर्ट की माने तो राजीव के गांव चकखजे गोविंदपुर में एक भी ऐसा शख्स नहीं था जिसकी आंखों में आंसू ना हो. वे भारतीय सेना में हवलदार के पद पर थे.दो दिन पहले पाकिस्तानी गोलीबारी में बुरी तरह जख्मी हो गये थे. उस वक्त वे भारत-पाक सीमा पर पेट्रोलिंग के लिये निकले थे. तभी पाकिस्तान की तरफ से भयंकर गोलाबारी हुई जिसमें वे जख्मी हुए. लेकिन उसके बावजूद उन्होंने पाकिस्तानियों का डटकर मुकाबला किया और अंततः वीरगति को प्राप्त हुए.
भू-मंत्र उन्हें सलाम करता है. आप मर कर भी हमारे दिलों में अमर है. जय जवान, जय किसान.
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