-आशुतोष शर्मा
संसदीय चुनाव से लेकर विधानसभा की अब तक की सभी चुनाव में बिहार का भूमिहार-ब्राह्मण अग्रगण्य रहा हालांकि 1990 के बाद जानबूझकर बिहार की राजनीतिक वजूद कम करने का प्रयास किया जाता है परंतु फिर भी बिहार का भूमिहार -ब्राह्मण राष्ट्रीय केंद्र बिंदु मानकर जातीयता से ऊपर उठकर मतदान करता रहा। आज भूमिहारों की यही राष्ट्रवादी सोच इसे निर्मूल करने पर उतारू है। भूमिहार-ब्राह्मण कभी सामंतवादी नहीं रहे परंतु स्वाभिमानी हमेशा से जरूर रहे। वर्षों तक बिहार के भूमिहार-ब्राह्मण इस मुगालते में रहे की सरकार हम बनाते हैं अस्तित्व की लड़ाई हम लड़ते हैं ,परंतु इस लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन और नेताओं के विचार ने इन्हें धरातल पर ले आया। बिहार के लाइमलाइट में आए नए अगड़ी जाति ने एकमात्र नरसंघार के बाद अपने आप को नतमस्तक कर विभिन्न राजनीतिक दलों में शरण ली ,परंतु बेचारा भूमिहार सैकड़ो नरसंहार का का पीड़ित, सैकड़ों समाज की विधवाओं का करुण क्रंदन सुनने के बाद भी स्वाभिमान सम्मान वश नही झुका और विपरीत शासन में भी अपने बहनों एवं बेटियों को सिंदूर का कर्ज उतारा जिसका परिणाम समाज के सभी वर्गों को शांतिप्रसाद के रूप में प्रदान हुआ।

बहुत दुखद अनुभूति हुआ जब इस जाति को जानबूझकर राजनीतिक परिदृश्य से गायब करने का षड्यंत्र किया गया और ऐसे एक पक्ष को जो अपने दम पर एक वोट भी भाजपा को नहीं दिला सकता। नेता प्रतिपक्ष जिसका अपना कोई राजनीतिक वजूद नहीं भाजपा की उम्मीदवारी तय करने को दिया गया है जिसमें बिहार के शीर्ष नेतृत्व को(c.p thakur) को गौण करना भी शामिल है । गिरिराज सिंह का नवादा से टिकट काटकर बेगूसराय भेजा जाना भी इसी की एक कड़ी है । विरोध के स्वर निकलते हैं तो कहता है भूमिहारो के पास कोई विकल्प नहीं है यह तो भूमिहार की अस्मिता पर खुली चोट है। सबसे बड़ी बात की पार्टी के आलाकमान जिन्हें पल पल की गतिविधीयों की ख़बर रहती है इस पर मौन साधे बैठी है ।
क्या सचमुच बिहार के भूमिहारों के पास कोई विकल्प नहीं? यदि हां तों इस अवसर पर भूमिहारो को यह बता देना चाहिए कि विकल्प है या नहीं है। भूमिहार सदैव अपने पुरुषार्थ पर जीता आया है आगे भी उसी पुरुषार्थ पर भरोसा कर निर्णय लेना चाहिए। नतमस्तक होने से अच्छा अपने आप को सामूहिक रूप से गंगा में विसर्जित कर देना अच्छा होगा, इस राजनीतिक ज़िल्लत से ।
निर्णय करें!
आपका अपना
आशुतोष शर्मा उर्फ़ (सोनू पांडे)
श्री कृष्ण नगर, औरंगाबाद





जब चुनाव आता है तो फिर हम लोग शुरू करते हैं तो कैसै आगे होकर नेतृत्व होगा, शुभ हो आपके साथ हूँ
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