Dr. Manish Kumar, neurosurgeon
दिल्ली/गुरुग्राम – भू-समाज में एक से बढ़कर एक भूमिपुत्र हैं जो समय-समय पर अपनी प्रतिभा से दुनिया को आश्चर्य में डाल देते हैं. ऐसे ही भूमिपुत्र हैं डॉ.मनीष कुमार. वे देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन हैं जिन्होंने हाल में एक ऐसी ब्रेन सर्जरी की जो सुर्खियाँ बटोर रही है. इस सर्जरी की ख़ास बात ये रही कि मरीज को बिना बेहोश किए ही ऑपरेशन किया गया. इस दौरान मरीज और डॉक्टर के बीच संवाद भी होता रहा. पार्क अस्पताल गुरुग्राम (गुडगाँव) में 19 अगस्त 2017 को ये सर्जरी डा.मनीष कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुआ. उनका साथ विशेषज्ञ डाक्टरों की एक टीम ने दिया. इस अवेक क्रैनियोटोमी (रोगी के सजग रहते हुए उसके सिर की सर्जरी) द्वारा मिर्गी के एक रोगी का इलाज कर उसे अपाहिज होने से बचाया गया.
Dr. Manish Kumar, neurosurgeon
Dr. Manish Kumar, neurosurgeon

दरअसल 42 वर्ष की उम्र का कंपनी में काम करने वाला एक मजदूर 2014 से मिर्गी के दौरों से पीड़ित था. जांच से उसके दिमाग के बाईं भाग में एक गाँठ के होनी और बढ़ते जाने की पुष्टि हुई थी. इस गाँठ के और बढ़ने की संभावना थी. यह गाँठ बढ़ते-बढ़ते दिमाग के उस जगह पंहुंचने वाला था जहाँ से रोगी का दाहिना हाथ और आवाज (बात – चीत) का नियंत्रण होता है. ऐसे में एक ओर जहाँ गाँठ के बढ़ने पर रोगी के दाहिने भाग में कमजोरी और आवाज में तकलीफ होने की संभावना थी, वहीं सर्जरी के कारण भी ऐसा होने की संभावना थी. ऐसे में सर्जरी के समय पूरी तरह बेहोश किये बिना सर्जरी करना एक तरीका हो सकता है. अवेक क्रैनियोटोमी (रोगी के सजग रहते हुए उसके सिर की सर्जरी) में ख़ास तरीकों और सावधानियों के साथ ब्रेन की सर्जरी होती है. सबसे अलग इसमें बेहोशी के लिए उपयोग में लाया जाने वाली दवाएं और तकनीक होती है.

साधारणतया सर्जरी के समय बेहोशी की तकनीक सुरक्षित होती है जिसमें बेहोशी के लिए ज्यादातर गैस का उपयोग किया जाता है. इसमें रोगी को बेहोश करते हीं मुंह से होकर एक ट्यूब अन्दर सीने में सांस की नली तक डाला जाता है जिससे होकर सांस और बेहोशी की दवायें दोनों दी जाती है. अवेक क्रैनियोटोमी (रोगी के सजग रहते हुए उसके सिर की सर्जरी) में सर्जरी के बीच में रोगी से बात करना और उसके हाथ पाँव हिलाने के टेस्ट की बार बार जरुरत होती है. ऐसे में मुंह में ट्यूब रखना असंभव हो जाएगा. इसलिए रोगी के मुंह में ट्यूब डाले बिना बेहोश रखना होता है. बेहोशी के लिए गैस के बदले ऐसी दवाओं का उपयोग किया जाता है जो सीधा खून की नालियों में सुई द्वारा दिया जा सके. फिर भी यदी रोगी की तबियत सर्जरी के दौरान खराब होती है और इस तरह बेहोश करना मुश्किल हो जाता है या अपेक्षित नतीजा निकलता हुआ नहीं लगता है तो सर्जरी के तरीके को बदला जाता है या सर्जरी को रोक दिया जाता है. इन सब बातों को सारे अगर – मगर – लेकिन किन्तु – परन्तु के साथ रोगी और उसके परिवार के लोगों को बतलाया जाता है जिससे सर्जरी के दौरान रोगी डॉक्टरों का साथ दे और सर्जरी के बाद डॉक्टर और रोगी के बीच कोई गलतफहमी पैदा न हो. यह रोगी और इसके परिवार के लोग बड़े हीं समझदार और सकारात्मक दृष्टिकोण वाले थे.
सर्जरी के पहले सर्जरी के विभिन्न चरणों, ऑपरेशन थिएटर के अन्दर होने वाले क्रिया कलापों, शोर, मशीनों की आवाजों तथा अन्य आवश्यक – अनावश्यक जानकारी रोगी और रोगी के सम्बन्धियों को दिया गया. इसके उपरांत 19 अगस्त 2017 को अवेक क्रैनियोटोमी (रोगी के सजग रहते हुए उसके सिर की सर्जरी) की तैयारी की गयी. सर्जरी के दौरान रोगी बात चीत करता रहा. जब गाँठ का वह हिस्सा जो आवाज के नियंत्रण केंद्र के पास था – हटाया जाने लगा तो रोगी की आवाज प्रभावित होने लगी. ऐसे में सर्जरी को रोक दिया गया. और रोगी को गुंगा होने से बचा लिया गया. सर्जरी के कुछ देर बाद उसकी आवाज सर्जरी के पहले जैसी ठीक हो गयी.
डॉक्टर मनीष कुमार ने बतलाया कि यह सर्जरी पार्क अस्पताल गुरुग्राम में उपलब्ध डॉक्टरों की उच्च स्तरीय टीम और तकनीकी मदद के कारण हीं संभव हो पाया है.रोगी स्वथ्य और घर जाने की प्रतीक्षा में है. डॉ.मनीष की इस कामयाबी पर भूमंत्र की तरफ से बधाई.

डॉ.मनीष कुमार का परिचय :

Dr. Manish Kumar, neurosurgeon
Dr. Manish Kumar, neurosurgeon

डॉ.मनीष कुमार मूलतः समस्तीपुर के रहने वाले हैं. उनके पिता श्री हरे कृष्णा किसान हैं और माता श्रीमती सुशीला देवी एक शिक्षिका हैं. उन्होंने दसवी तक की प्रारंभिक शिक्षा समस्तीपुर में ग्रहण की. उसके बाद लंगट सिंह कॉलेज,मुजफ्फरपुर से आईएससी की. उसके बाद बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में आगे की पढाई के लिए गए. फिर उनका चयन मेडिकल के लिए हो गया. मदुरई मेडिकल कॉलेज से उन्होंने अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी की. अपोलो अस्पताल में उन्होंने न्यूरोसर्जरी में विशेषज्ञता हासिल की.इस दौरान वे 23 साल तमिलनाडु में रहे. वर्ष 2015 में वे दिल्ली आ गए. इस वक़्त वे पार्क हॉस्पिटल ग्रुप में बतौर न्यूरोसर्जन काम कर रहे हैं.

Community Journalism With Courage