दहेज़ से बर्बाद हो रहे हैं घर
शैलेन्द्र-
परशुराम जी की जयंती पर सभी लोगों ने बधाई संदेश दिया तो मेरे मन मे भी अपने ईष्टश्री प्रभु परशुराम जी की जयंती पर अपने समाज की कुरीतियाँ और कोढ़ कहे जाने वाले दहेज प्रथा पर लिखने का विचार आया| हो सकता है ये सद्बुद्धि भी अपने ईष्ट देव का ही दिया हो|
समाज का कोढ़ कहे जाने वाले दहेज, उसका कारण और निदान:
अपने समाज मे शादी विवाह मे होने वाले खर्च को अपने प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखते है चाहे लड़की का शादी हो यो लड़के का बारात कितने साज-सज्जा के साथ आया और बारातियो का स्वागत कितने अच्छा से किया गया ये हमारे प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है और इसी प्रतिष्ठा को बचाने के लिये हर साल हमारे जमीन बिक रहे है|
दहेज का कारण:
1. खर्चीली शादी : जैसा ऊपर मैने बताया कि लड़के की शादी भी हमारे समाज में काफी खर्चीला है, आज भी बहुत लोग लड़के की शादी मे कार का काफीला, बाई जी का डांस, और काफी साज सज्जा से बारात लेकर जाते है उसपर आने वाले खर्च भी लड़की के पिता को, ही वहन करना पड़ता है जिनका लड़का उस योग्य नही है कि उनको उतना दहेज मिल सके तो वो अपना कुछ जमीन बेचकर अपना प्रतिष्ठा बचाने के लिये ये खर्च वहन कर रहे है|
समाधान: अपने समाज के प्रतिष्ठित लोग अगर सादगी से अपने बेटे और बेटी की शादी मंदिर या घर पर ही साधारण तरीके से फिजूल खर्ची न करते हुए करे तो माध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर भी इसका अच्छा असर पड़ेगा और शादी विवाह मे फिजूल मे होने वाले 5-10लाख का खर्च बचाया जा सकता है|
2. प्रतिष्ठा और प्रदर्शनी से जुड़ा मामला : हमारे समाज मे जेवर और सामान का चढ़ावा भी प्रतिष्ठा और प्रदर्शनी से जुड़ा हुआ है लड़की के पिता भी अगर देंगे 5 लाख तो, अपने गांव मे हल्ला करेंगे कि 10 लाख दिये| और लड़के वालो से भी अच्छे जेवरात और परिवार के सदस्यों के लिये महंगे कपड़ो की अपेक्षा करते है ताकि गांव मे प्रतिष्ठा बढ़े| इस प्रतिष्ठा का कीमत भी तो दहेज मे ही जुड़ेगा| वही लड़के वाले समाज मे प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिये बर्तन, टी. वी., फ्रिज, ए. सी., कार आदि का मांग करते है चाहे, पहले से ही उनके यहाँ से सामान भरा पड़ा हो, कुछ लोगो के यहाँ तो रखने का जगह बनाने के लिये अतिरिक्त कमरो का निर्माण करवाया जाता है|
समाधान: ऐसे झूठी प्रतिष्ठा के लिये धन की बर्बादी को रोकना चाहिये, सामानो का लेन देन और महंगे कपड़ो का लेन देन बंद होना चाहिये| इससे भी दहेज के रूप मे 5-10 लाख का फिजुल खर्च से बचा जा सकता है|
3. महत्वपूर्ण कारण: आज अपने समाज मे बहुतो के लड़के सरकारी नौकरियों मे जाते है बहुतो अपने लड़को को IAS, IPS बनाने के लिये अपने जमीन तक बेच देते है| पर कितने माता -पिता अपने बेटी को पढ़ाने और IAS, IPS बनाने के लिये जमीन बेचने को तैयार है क्या हमारे बेटियो मे IAS, IPS बनने का क्षमता नही है या हमे अपने बेटियो की क्षमता पर विश्वास नही है| हमारे बेटियो मे भी क्षमता है पर हम अपने बेटियो के पढ़ाई पर खर्च कर उसे आत्म निर्भर होने की वजाय उसके दहेज के लिये पैसा जमा करने मे लगे रहते है| गांवो मे तो स्थिति और भी भयावह है कुछ घरो मे तो बेटियो को प्राथमिक शिक्षा भी नही दिया जाता है|
समाधान: आप लाख दहेज के लिये धन जमा कर ले वो रकम अपने बेटियो के लिये राजकुमार ढूढ़कर लाने के लिये हमेशा बहुत कम पड़ेगा| वही अगर आप अपने, बेटियो को पढ़ा लिखा कर स्वावलंबी बनाते है तो खुद आपके बेटियो के लिये बिना दहेज के मांग के राजकुमारो की लाईन लगा रहेगा|
4. दहेज देकर लड़का खरीद लिया- सम्मान गँवा दिया : रिश्ता अपने बराबर मे न कर अपने से बहुत ऊँचे परिवार मे करने का स्वप्न: मेरा एक सवाल है कि अगर आपकी लड़की IAS है तो क्या आप अपनी लड़की के लिये एक चपरासी लड़का पसंद कीजियेगा? आपका जवाब होगा नही चाहे वो लड़का वाले मुफ्त मे शादी करने को तैयार हो| फिर आप, ये अपेक्षा कैसे रख, सकते है कि हमारी बेटी कम पढ़ी लिखी और बेरोजगार हो और लड़का IAS, IPS मिल चाहे| आपकी लड़की IAS है तो आप IAS लड़का तो ढ़ढियेगा ही साथ ही साथ ये भी देखियेगा कि किसी उद्योयपति या मंत्री का लड़का हो| लड़की हमारी अगर क्लर्क है तो लड़का हमे आँफिसर चाहिये| उसके लिये हम मुँह मांगा दहेज देने के लिये तैयार रहते है| और कहते भी है कि कितना मांगेगा उतना देंगे| अच्छी बात है हर माता पिता अपने बेटी को अच्छा परिवार मे देना चाहते है| परन्तु हम कही न कही हम अपने बेटियो को अपने के बड़े हैसियत के परिवार मे पैसो के बदौलत विवाह तो करा देते है पर हमारी बेटियो को वो मान सम्मान नही मिल पाता है जो अपने बराबर या अपने से थोड़ा नीचे हैसियत वालो के यहाँ मिलेगा|
समाधान: शिक्षित और स्वालंबी बिटिया दहेज़ को दूर भगाएगी : सभी माता-पिता की ख्वाहिश होती कि बिटिया के लिये IAS या IPS लड़का मिले पर उस ख्वाब को पूरा करने के लिये हमे भी तो अपने बेटी योग्य बनाना होगा| अब लोग गृहिणी नहीं पढी-लिखी और नौकरी वाली बहू ढूंढते हैं.इसलिए लड़कियों की शिक्षा और उसे स्वालंबी बनाने की दिशा में ध्यान देने की जरुरत है.
बेटियों को भी बेटे के समान अधिकार : उपर्युक्त कारणों और उसके समाधान पर विचार कर दहेज की कुरीतियो को कुछ हद तक कम किया जा सकता है| इसके लिये हमें बेटियों को भी बेटे के समान समानता का अधिकार देना होगा| बेटियो को भी बेटे की तरह आगे बढ़ने का मौका देना होगा|




एक अच्छा विचार है। समय के इसे अमल में लाना ही होगा।
Comments are closed.