Cast your vote

किसी भी समाज की ताकत उसके एकमुश्त वोट से तय होती है। वोटों में बिखराव या वोटिंग से दूरी किसी भी समाज को राजनीतिक रूप से कमजोर बनाती है। भूमिहार समाज की यही किनाराकशी उसे राजनीतिक रूप से लगातार कमजोर बना रही है। लेकिन अब वक्त आ गया है जब इस कमजोरी को दूर करते हुए एकमुश्त वोट अपने प्रत्याशी के पक्ष में डाला जाए। स्थानीय लोगों के लिए तो कोई समस्या नहीं, लेकिन जो बाहर रहते हैं उन्हें अभी से इसकी तैयारी कर लेनी चाहिए। इसलिए अपने लोकसभा चुनाव के दिन के अनुसार अपने लौटने का टिकट अभी से बुक कर लें। अपना वोटिंग 100% होना सुनिश्चित कर ले। ताकत दिखाने के लिये अपने समाज का 100 प्रतिशत वोटिंग जरूरी है। ध्यान रखिये की अपने बहुमत वाले 5 सीटों के अलावा भी अन्य सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना बहुत ही जरूरी है। आज उपस्थिति दर्ज कराएंगे तो ही कल बाकी के सीटों पर भी अपना हक जता सकेंगे ।

आइये सर्वप्रथम आज बिहार के उन लोकसभा क्षेत्रों की चर्चा करते हैं जहाँ कि विभिन्न राष्ट्रीय दलों से भूमिहार ब्राम्हण समाज के राजनैतिक उम्मीदवारों की प्रथम दावेदारी बनती है :
1) मोतिहारी
2) मुजफ्फरपुर
3) वैशाली
4) बेगुसराय
5) जहानाबाद
6)नवादा
7) मुंगेर
8)औरंगाबाद
9)कटिहार
10)महाराजगंज
11) छपरा
12)आरा
13)बक्सर
14)भागलपुर
15)पटना साहिब
16) पाटलिपुत्र

उपरोक्त लोकसभा क्षेत्रों के अलावा झारखण्ड ,उत्तरप्रदेश और दिल्ली के जिन लोकसभा क्षेत्रों पर भूमिहार समाज की मजबूत राजनैतिक दावेदारी होनी चाहिए उसका व्यौरा निम्न है :
1) कोडरमा (झारखण्ड )
2)गोड्डा
2) धनबाद
4)बलिया (उत्तरप्रदेश )
5)ग़ाज़ीपुर
6)बनारस
7)इलाहाबाद
8)घोषी
9)देवरिया
10)दिल्ली पश्चिम (दिल्ली)
11)दिल्ली नार्थईस्ट

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