– अभिषेक शर्मा, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट

बिहार भाजपा की एक प्रेस वार्ता हुई जिसकी अध्यक्षता पार्टी के महासचिव भूपेन्द्र यादव ने की। अन्य लोग जो थे, वो थे डॉ. सीपी ठाकुर, सच्चिदानंद राय और अन्य वर्गों के कुछ लोग। पूरी प्रेस वार्ता का सार ये है:

१. भाजपा ने 10% वाली कृपा की है।
२. समाज के नेताओं को चार्टर्ड फ़्लाइट से दिल्ली पटना कराया गया है।
३. राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने दो बार दिव्य दर्शन दिए।
४. समाज की नाराज़गी कुछ ऐसे शांत होगी कि आने वाले समय में राज्यसभा और विधान परिषद में जो रिक्तियाँ होंगी उनमें समाज के “नेताओं” को प्राथमिकता पर आगे किया जाएगा। उम्मीदवार कौन होगा आप जानते ही हैं।
५. कुछ बातें गुप्त रहने की बात भी की जो, वक्ताओं के अनुसार, बताई नहीं जा सकती।

डॉ. सीपी ठाकुर ने समाज के आक्रोश के शमन के लिए जो बयान कल जारी किया था उसके विरोध के बावजूद वो वही किए। आने वाली रिक्तियों में समाज से कौन जाएगा वो तो प्रेस वार्ता से स्पष्ट है कि वर्तमान सांसद और पार्षद की पुनरावृत्ति होगी। स्थिति तो फिर वहीं के वहीं है, मिला क्या?

लोक सभा को ले कर कोई आश्वासन नहीं। लोकसभा में “भूमिहार” सांसद न होने पर पूरे पाँच वर्ष तक भूमिहार अपने हितों के लिए किसके पास जाएगा? आक्रोश के समय भूमिहार और अन्य समय में जातिवाद से दूर सीपी ठाकुर के पास? यह भूमिहार के साथ विश्वासघात है। कितने हल्के में तौला गया समाज को और ये दो ग़द्दार तौलवा आए?

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