भाजपा का चरित्र बदल रहा है। कभी बाभन बनिया की पार्टी कही जानेवाली भाजपा अब ठाकुर बनिया की पार्टी बनती जा रही है। केन्द्र में और यूपी में पार्टी के जो प्रमुख निर्णायक हैं वो या तो बनिया हैं या फिर ठाकुर।

बीजेपी को सबसे ज्यादा उम्मीद यूपी से ही रहती है। अमित शाह खुलकर कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री का रास्ता यूपी होकर ही जाता है इसलिए मोदी को पीएम बनना हुआ तो वो यूपी के प्रभारी बनकर आये। उस वक्त और आज भी यूपी की राजनीति में मोदी के सबसे बड़े प्रचारक ब्राह्मण मतदाता ही हैं। पता नहीं क्या है लेकिन ब्राह्मणों को ही मोदी में भगवान नजर आता है।

लेकिन मोदी ने बड़ी सफाई से यूपी से एक दो गर्दुल्लों को ब्राह्मण चेहरा बनाकर खानापूर्ति कर ली। लेकिन हिन्दुत्ववादी सत्ता की असली चाभी बनियों ने अपने हाथ में रखी। बाबू राजनाथ सिंह क्योंकि चालाक प्राणी है इसलिए बिना किसी जनाधार के ठाकुर कार्ड खेल गये।

लेकिन बाबू राजनाथ सिंह और मोदी ही अकेली जोड़ी नहीं है। इधर यूपी में भी ठाकुर बंसल की जोड़ी के हाथ में सत्ता की बागडोर है। ब्राह्मण के नाम पर जिस व्यक्ति को उपमुख्यमंत्री बना रखा है उसकी कुल राजनीतिक हैसियत ये है कि वो साहब लखनऊ के मेयर रहे हैं। इससे आगे न तो प्रदेश में उन्हें कोई जानता है और न वो प्रदेश में किसी को जानना चाहते हैं।

आपको भरोसा न हो तो विकास दूबे एनकाउण्टर मामले में सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं को देख लीजिए। अधिकतर ठाकुर और बनिया ही इस एनकाउण्टर को सही ठहराने में सबसे ज्यादा मेहनत क्यों कर रहे हैं? अगर योगी की कोई जाति नहीं है तो ये बात सबसे ज्यादा ठाकुर लोग ही क्यों प्रचारित कर रहे हैं? असल में मामला विकास दूबे है ही नहीं। मामला है जातीय गठजोड़ का। इन्हीं लोगों ने विकास दूबे के दूबे पर इतना जोर दिया है कि इस पूरे एनकाउण्टर प्रकरण पर सवाल इसलिए नहीं उठा सकते क्योंकि केवल उपमान के कारण आपको एक अपराधी का समर्थक बता दिया जाएगा।

खैर अब देखना ये है कि बीजेपी का ये ठाकुर बनिया गठजोड़ कहां तक जाता है। बीजेपी के इस नये राजनीतिक उदय को मेरी पूरी शुभकामना। उम्मीद करता हूं कि बीजेपी का हिन्दुत्व सत्ता के शिखर पर यूं ही चमकता रहेगा। (वरिष्ठ पत्रकार संजय तिवारी के सोशल मीडिया से साभार)

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