BJP ki Bhumihar Niti

– चैतन्य शर्मा

बिहार में एक दौर ऐसा आया जब लालू और सरकार समर्थित नक्सलवाद अपने चरम पर पहुंच गए। भूमिहारों ने नक्सलवाद से लोहा लिया और नाको चने चबवा दिए। उस समय की सत्ता को ये पसंद नहीं आया और सवर्णों और उसमें भी खासकर भूमिहारों को हाशिये पर डालने की पुरजोर कोशिश हुई।

बहरहाल लालू और नक्सलवाद के विरोध में भूमिहारों ने बीजेपी को मजबूत किया। अपने खून पसीने से बिहार में इस पार्टी को सींचा। धीरे- धीरे इसकी बिहार में जड़े मजबूत हो गयी। तब बीजेपी भूमिहारों की ही जड़ काटने में लग गयी। इस नीति के तहत बीजेपी ने धीरे-धीरे जो भी भूमिहार में मजबूत, विद्वान या फिर जमीनी नेता थे उनको किनारे लगा दिया और जानबूझ कर रीढ़ विहीन और हवाई नेताओं को बीजेपी में आगे बढ़ाया गया। टिकट वही का दिया जहाँ भूमिहार केंडिडेट देना मजबूरी था। वैसे भाजपा की पहली कोशिश यही रही कि भूमिहार सीट को सहयोगी दलों को दे दी जाए और यदि ऐसा न हो तो फिर किसी रीढ़ विहीन भूमिहार नेता खड़ा कर दिया जाए।

भाजपा से मेरा इसी बात को ही लेकर विरोध है। ऐसे बताते चलूँ कि राजनीति से मेरा दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। किसी के जीतने या हारने से मुझे कोई व्यक्तिगत हानि या लाभ नहीं होने वाला है, लेकिन बात समाज की है, सो कहना जरूरी समझा।

3 COMMENTS

  1. Ek dam bt m dam h .lakin bhu aane bala deno m kebal jhanda uthaye GA apne say hi kebal dusmane h

  2. भाई कोई गरीब भुमिहारों से पुछो आपका समाज आपके बहन बेटियों के शादी में मदद किया आपके जीविकोपार्जन में समाज मदद करता है ?
    कांग्रेस, वामपंथी,राजद कभी भुमिहारों का मदद किया है?

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