भूमिहार मंत्र पर 4 जून 2012 को आनंद प्रधान पर की गयी टिप्पणी :
आनंद प्रधान जैसे लोग भूमिहार होने के सारे फायदे तो उठाते हैं. लेकिन मौका मिलने पर भूमिहारों को गुंडा , लफंगा , सामंती और गुंडा कहने से भी बाज नहीं आते. शायद ऐसे ही लोगों को जयचंद कहा जाता है. गद्दार. ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए. आनंद प्रधान ने कल अपने फेसबुक वॉल पर लिखा – “दिया बुझने से पहले भभकता है…बिहार में भी सामंती ताकतें बुझने से पहले भभक रही हैं…उनका हश्र तय है…उनकी जगह सिर्फ इतिहास के कूड़ेदान में है.” यह वही आनंद प्रधान है जो हरेक मौके पर भूमिहार होने के फायदे उठाते रहे हैं. चाहे वो बीएचयू के चुनाव जीतने की बात हो या टीवी पर दिखने की. आप भी पहचान लें इस जयचंद को…. आनंद प्रधान का पूरा स्टेटस इस प्रकार है जिसे पढकर आप भी खौल जायेंगे .
Anand Pradhan – पटना की सड़कों पर रणवीर सेना के गुंडों-लफंगों ने जिस तरह से सरकारी संरक्षण में खुलेआम लूटपाट, मारपीट, तोड़फोड़, आगजनी, महिलाओं/लड़कियों के साथ छेड़खानी, आमलोगों और मीडियाकर्मियों पर हमला किया है और अराजकता और उपद्रव के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, इससे नीतिश कुमार के सुशासन की पोल खुल गई है…इस सरकार ने सामंती-अपराधी गुंडों के आगे समर्पण कर दिया है…कल आरा और आज पटना में जो कुछ हुआ है, उससे बिहार में ‘सुशासन’ की सच्चाई सामने आ गई है…लगता है कि बिहार में कानून का राज खत्म हो गया है…बिहार के लिए काला दिन है यह…लेकिन सवाल यह है कि इन सामंती गुंडों को ताकत कहाँ से मिल रही है? इन सामंती गुंडों-अपराधियों को ताकत मिल रही है, जे.डी-यू, भाजपा, राजद और कांग्रेस जैसी पार्टियों और उनके नेताओं से जो इन अपराधियों के आगे घिघिया रहे हैं…साफ़ है कि बिहार के गरीब-गुरबों को अपने हक-हुकूक और अपनी हिफाजत करने लिए खुद खड़ा होना होगा…क्योंकि नीतिश की सरकार तो इन गुंडों के साथ खड़ी है…लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार में इतिहास के पहिये को पीछे लौटा ले जाने की यह उन्मत्त कोशिश कामयाब हो पाएगी? दिया बुझने से पहले भभकता है…बिहार में भी सामंती ताकतें बुझने से पहले भभक रही हैं…उनका हश्र तय है…उनकी जगह सिर्फ इतिहास के कूड़ेदान में है…बिहार इसका अपवाद नहीं है…





बहुत सटीक विश्लेषण
तभी तो ऐसे लोगों की पत्नी उन्हें लात मारकर एक बुड्ढे के साथ भाग जाती है।
Comments are closed.