Anant Singh

 

– असित नाथ

इस पोस्ट में दो तस्वीरों को इसलिए साझा किया है ताकि ये ठीक से समझा जा सके कि राजनीति कैसे इस्तेमाल के बाद किसी को ठिकाने लगाती है। बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने दिल्ली में सरेंडर किया और अब पटना के बेऊर जेल पहुंच गए हैं। अनंत को बहुत पहले बेऊर पहुंच जाना चाहिए था। अब तक तो कई मामलों में अनंत को सज़ा भी हो जानी चाहिए थी। आज जो हो रहा है वो राजनीति से ही प्रेरित है वरना, क़ानून को ठीक से काम करने दिया गया होता तो अनंत आज कई मामलों में सजायाफ्ता होते। लेकिन तब वो सत्ता की ज़रूरत थे। तब एक खास वोट बैंक के लिए नीतीश कुमार और बीजेपी, दोनों को उनकी ज़रूरत थी। अपराधी वो तब भी थे जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके सामने हाथ जोड़े खड़े रहते थे। लेकिन तब वो सत्ता के लिए नीतीश कुमार की ज़रूरत थे। ज़रूरत नहीं होते तो एक मुख्यमंत्री एक बाहुबली विधायक को देखते ही हाथ जोड़ते हुए कुर्सी छोड़ कर खड़ा नहीं होता। बिहार के लोगों ने ये साफ देखा है कि अनंत सिंह ने कभी भी नीतीश कुमार को देख कर हाथ नहीं जोड़े और ना ही कुर्सी से उठ खड़े हुए। लेकिन नीतीश कुमार ने हर बार अनंत सिंह के सामने हाथ जोड़े हैं और देख कर कुर्सी छोड़ी है। बिहार के लोगों ने ये भी देखा है कि कैसे बिहार बीजेपी के सबसे बड़े नेता उनके सामने हाथ जोड़े, कमर झुकाए खड़े रहा करते थे। अनंत तब भी कोई संत नहीं थे। तब वो अपराध के चरम पर थे। हुआ ये कि ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के बाद एक जाति विशेष का वोट नीतीश कुमार से नाराज होकर बीजेपी के खाते में जा गिरा। अब अनंत कुमार, नीतीश कुमार के लिए उतने ज़रूरी नहीं रहे। रही-सही कसर 2013-14 के अंधे धार्मिक उन्माद ने पूरी कर दी। जिस वोट बैंक के लिए अनंत ज़रूरी थे वो वोट बैंक अंध धर्मिक सियासत के तूफान में उड़कर खुद भाजपाई हो गया। तो अनंत ना तो अब नीतीश की ज़रूरत हैं और ना ही बीजेपी की। और मुश्किल ये कि ठसक वाले बाहुबली अनंत ना तो नीतीश के सामने हाथ जोड़ेंगे और ना ही सुशील मोदी के सामने। इसलिए अब वो बेऊर में ही रहेंगे। अगले विधानसभा चुनाव से पहले बने माहौल से ये तय होगा कि उन्हें ज़मानत मिलनी है या उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने हैं। क्योंकि, पुख्ता सबूत के अभाव में मुकदमों से बरी कई बड़े बाहुबली ‘सबूत के अभाव’ के एवज में नीतीश कुमार की सरकार को मजबूती दे रहे हैं और बीजेपी के प्रचंड हिंदुत्व को ताकत दे रहे हैं।

(लेखक के वॉल से साभार)

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