anand pradhan vampanthi bhumihar
आप कन्हैया से परेशान हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी बिरादरी में एक-से-एक दगाबाज़ बैठे हैं जो वामपंथ की खाल ओढकर भीतर-ही-भीतर आपको खोखला कर रहे हैं.कन्हैया तो इनसे लाख दर्जा अच्छा है जिसने खेल शुरू होते ही अपने ताश के पत्ते को खोल दिया.
कहने का मतलब हैं कि कन्हैया की विचारधारा से आप पूरी तरह से परिचित हैं. लेकिन उनका क्या जो भूमिहार होने के सारे फायदे तो उठाते हैं लेकिन मौका मिलते ही समाज से दगाबाजी का मौका नहीं चूकते. वैसे तो इस सूची में कई नाम है लेकिन आज उदाहरण के तौर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन में बतौर अध्यापक अध्यापन कार्य कर रहे आनंद प्रधान का जिक्र करना चाहेंगे और वक्त के उस दौर में ले जाएंगे जब रणवीर सेना के संस्थापक और अन्याय के खिलाफ ताउम्र लड़कर बहादुरी की मिसाल कायम करने वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया की धोखे से हत्या कर दी गयी.
पूरा भू समाज उस वक्त शोक में डूबा था. लेकिन दूसरी तरफ मावोआदी और दिल्ली में बैठे उनके वामपंथी आका जश्न मना रहे थे और कलम से आग उगल रहे थे कि नायक नहीं खलनायक का अंत हुआ है.उन्हीं में से एक आनंद प्रधान भी थे जो भूमिहार होने के बावजूद ज़हर उगल रहे थे.
उस वक्त (4जून 2012 को आनंद प्रधान के बयान को लेकर ‘भूमिहार मंत्र’ ने लिखा था, आज उसे अपने पाठकों के सामने फिर पेश कर रहे हैं ताकि वामपंथ की खाल ओढ़े ऐसे भूमिहारों से समाज सावधान हो जाए.
बताते चले कि आनंद प्रधान वही शख्स हैं जिनकी पत्नी अमृता राय ने उन्हें छोड़कर कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह से शादी रचा ली और पूरे मामले का खुलासा होने पर बहुत हंगामा हुआ था. तभी से उस शर्मिंदगी से बचने के लिए आनंद प्रधान सोशल मीडिया से जो गायब हुए, आजतक वापस नहीं आए.

भूमिहार मंत्र पर 4 जून 2012 को आनंद प्रधान पर की गयी टिप्पणी : 

आनंद प्रधान जैसे लोग भूमिहार होने के सारे फायदे तो उठाते हैं. लेकिन मौका मिलने पर भूमिहारों को गुंडा , लफंगा , सामंती और गुंडा कहने से भी बाज नहीं आते. शायद ऐसे ही लोगों को जयचंद कहा जाता है. गद्दार. ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए. आनंद प्रधान ने कल अपने फेसबुक वॉल पर लिखा – “दिया बुझने से पहले भभकता है…बिहार में भी सामंती ताकतें बुझने से पहले भभक रही हैं…उनका हश्र तय है…उनकी जगह सिर्फ इतिहास के कूड़ेदान में है.” यह वही आनंद प्रधान है जो हरेक मौके पर भूमिहार होने के फायदे उठाते रहे हैं. चाहे वो बीएचयू के चुनाव जीतने की बात हो या टीवी पर दिखने की. आप भी पहचान लें इस जयचंद को…. आनंद प्रधान का पूरा स्टेटस इस प्रकार है जिसे पढकर आप भी खौल जायेंगे .

Anand Pradhan – पटना की सड़कों पर रणवीर सेना के गुंडों-लफंगों ने जिस तरह से सरकारी संरक्षण में खुलेआम लूटपाट, मारपीट, तोड़फोड़, आगजनी, महिलाओं/लड़कियों के साथ छेड़खानी, आमलोगों और मीडियाकर्मियों पर हमला किया है और अराजकता और उपद्रव के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, इससे नीतिश कुमार के सुशासन की पोल खुल गई है…इस सरकार ने सामंती-अपराधी गुंडों के आगे समर्पण कर दिया है…कल आरा और आज पटना में जो कुछ हुआ है, उससे बिहार में ‘सुशासन’ की सच्चाई सामने आ गई है…लगता है कि बिहार में कानून का राज खत्म हो गया है…बिहार के लिए काला दिन है यह…लेकिन सवाल यह है कि इन सामंती गुंडों को ताकत कहाँ से मिल रही है? इन सामंती गुंडों-अपराधियों को ताकत मिल रही है, जे.डी-यू, भाजपा, राजद और कांग्रेस जैसी पार्टियों और उनके नेताओं से जो इन अपराधियों के आगे घिघिया रहे हैं…साफ़ है कि बिहार के गरीब-गुरबों को अपने हक-हुकूक और अपनी हिफाजत करने लिए खुद खड़ा होना होगा…क्योंकि नीतिश की सरकार तो इन गुंडों के साथ खड़ी है…लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार में इतिहास के पहिये को पीछे लौटा ले जाने की यह उन्मत्त कोशिश कामयाब हो पाएगी? दिया बुझने से पहले भभकता है…बिहार में भी सामंती ताकतें बुझने से पहले भभक रही हैं…उनका हश्र तय है…उनकी जगह सिर्फ इतिहास के कूड़ेदान में है…बिहार इसका अपवाद नहीं है…

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