मोदी नीति पर नीतिश के बोल सुनकर लालू का माथा ठनका: नोटबंदी के मसले पर जब तकरीबन सभी विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार की घेराबंदी कर रही है तब नीतिश कुमार ने अप्रत्याशित रूप से समर्थन कर भाजपा और लालू दोनों को आश्चर्य में डाल दिया.
नीतिश ने तो एक कदम आगे बढ़कर बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई का भी एडवांस में ही समर्थन कर दिया. चुकी नीतिश ने मोदी विरोध की वजह से ही भाजपा से नाता तोड़ा था. इसलिए उनका समर्थन भाजपा के लिए भी मायने रखता है. 
लेकिन नीतिश ने जिस तरह से खुलकर नोटबंदी की तारीफ़ की है उससे लालू यादव का ब्लड प्रेशर जरूर बढ़ गया. उन्हें नीतिश के समर्थन में राजनीतिक गणित दिख रहा होगा जो यथार्थ के करीब भी हो सकता है. 
दुनिया जानती है कि लालू यादव और नीतिश कुमार में बड़े वैचारिक मतभेद हैं और मोदी डर की वजह से ही वे लालू के साथ मिले थे. लेकिन वास्तव में दोनों पारंपरिक वैचारिक विरोधी है और दोनों की राजनीति का दायरा आपस में टकराता है. 
बहरहाल राजद और जदयू गठबंधन की सरकार तो बन गयी, लेकिन सुशासन बाबू के क्लीन इमेज पर बिहार में बढ़ते अपराध आदि ने धब्बा जरूर लगा दिया. नीतिश को राजद के गुंडों का ये उत्पात रास  नहीं आ रहा.उनके सुशासन की छवि पर ये प्रश्नचिंह है.
फिर लालू के बेटों की बढ़ती दखलंदाजी भी नीतिश को खटक रहा है. लालू यादव का हिडन एजेंडा भी वे जानते ही हैं कि केंद्र की राजनीति का लोलीपॉप दिखाकर वे बिहार की राजनीति से नीतिश को किनारे लगाना चाहते हैं ताकि उनके नौवी पास सुपुत्रों के लिए मैदान साफ हो जाए. 

ऐसे में यदि नीतिश और भाजपा पुरानी बातों को भूलाकर फिर से एक साथ आ जाएँ तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा. लेकिन लालू यादव के लिए ये नोटबंदी से भी बड़ा आघात होगा. ऐसा होता है तो इसे मोदी की राजनीति में ‘लालूबंदी’ कह सकते हैं.

ज़मीन से ज़मीन की बात – भू-मंत्र

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