कोरोनावायरस के कारण पूरी दुनिया में लॉकडाउन की स्थिति है. भारत में भी लॉकडाउन लागू हुए महीने भर से ऊपर हो चुका है और अब भी इसके खुलने के आसार दिखाई नहीं दे रहे . ऐसे में दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों और छात्रों के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गयी है. वे घर से दूर कितने दिन और कैसे इस लॉकडाउन की स्थिति में रहे. इस को देखते हुए यूपी समेत कई राज्यों की सरकारों ने अपने मजदूरों और छात्रों को एहतियात के साथ घर लाने की व्यवस्था कर रही है.लेकिन बिहार में इसे लेकर अबतक कोई सुगबुगाहट नहीं है. उलटे राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान आ रहा है कि सभी को वापस बुलाने लगे तो लॉकडाउन का मजाक उड़ जाएगा! (पढ़िए – सभी को वापस बुलाने लगे तो लॉकडाउन का मजाक उड़ जाएगा – नीतीश कुमार )
लेकिन सवाल ये उठता है कि बिहार के छात्र कोटा जैसी जगहों पर और कितने दिन रहेंगे और जब दूसरे राज्य के लोग अपने छात्रों को पूरे एहतियात के साथ वापस बुला रहे हैं तो बिहार के छात्रों को यूं ही दुसरे राज्यों में छोड़ देना कहाँ तक जायज है? इसी मुद्दे पर भूमंत्र ने वरिष्ठ राजनेता और भारतीय सबलोक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि बिहार की सरकार हठधर्मिता पर उतारू है और उसे बिहारी छात्रों की कोई चिंता नहीं है. सुनिए उनका पूरा वीडियो इंटरव्यू –
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डॉ. अरुण कुमार के वीडियो इंटरव्यू की ख़ास बाते - - कोटा में रह रहे बिहारी छात्रों की बुरी स्थिति, उन्हें अविलंब वापस बुलाने की व्यवस्था की जाए. - सभी राज्य की सरकार अपने छात्रों को बुला रही है - सुशासन की सरकार हृदयहीन हो गयी है - प्रधानमंत्री से बिहार की जनता को उम्मीद है, कृपया इसमें दखल दे और लाचार बिहार के छात्रों को राज्य वापस लाने में मदद करे. - बिहार में अराजकता का माहौल है.शिक्षक भूख से मर रहे हैं और किसान के बेटे कोटा में बिलबिला रहे हैं. - लॉकडाउन अच्छी बात है लेकिन उसका तरीका होना चाहिए. - प्रधानमंत्री जी राष्ट्रवाद में मानवता न कहीं दम तोड़ दे!




