मुख्तार अंसारी जीता, भाई और बेटे को करारी शिकस्त

उ.प्र. में बाहुबली मुख्तार अंसारी का लंबे समय से अपना एक राजनीतिक वजूद रहा है. ये हौव्वा रहा है कि मुख्तार अंसारी का समर्थन करने का मतलब है, पूर्वांचल के 15 से अधिक सीटों पर प्रभाव पड़ना. इसी वजह से कृष्णानंद राय हत्याकांड में सलाखों के पीछे होने के बावजूद मुख्तार अंसारी को सपा और बसपा जैसी पार्टियाँ हाथो-हाथ लेती रही है. मुस्लिम वोटों के हिसाब से बसपा ने मुख्तार अंसारी को अपनी पार्टी में लेकर यही दांव एक बार फिर खेला.लेकिन ये दांव इस बार कारगर नहीं हुआ और मोदी लहर में बसपा के साथ-साथ मुख्तार अंसारी का परिवार भी बह गया. मोहम्मदाबाद में अलका राय से मुख्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्लाह को करारी शिकस्त मिली तो बेटा अब्बास अंसारी भी घोषी सीट से हार गया. मुख्तार अंसारी मउ से बमुश्किल अपनी सीट बचाने में कामयाब रहा.उसने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के सहयोगी दल ‘भासपा’ के महेंद्र राजभर को 7464 मतों से हराया. घोसी सीट पर मुख्तार के बेटे अब्बास को 81 हजार 295 जबकि भाजपा प्रत्याशी फागू चौहान को 88 हजार 298 मत मिले. मुहम्मदाबाद (यूसुफपुर) में सिबगतुल्ला को भाजपा प्रत्याशी अलका राय के हाथों हार का सामना करना पड़ा. अलका को एक लाख 22 हजार 156 जबकि सिबगतुल्ला को 89 हजार 429 मत मिले. 
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