कन्हैया को लोग जूनियर केजरीवाल यूं ही नहीं कहते.बेसिर-पैर का बयान देना उसका शगल बन गया है. सबसे बड़ी बात किसी भी मसले में जबरन पीएम मोदी का नाम घसीट लाना ताकि उनके बहाने लाइमलाईट में आ जाया जाए.हाल ही में ऐसा एक बयान फिर से कन्हैया ने दिया.

मामला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के लापता छात्र नजीब अहमद से संबंधित था. आप जैसा कि जानते ही हैं कि जेएनयू का ये छात्र अचानक गायब हो गया और पुलिस/प्रशासन की कोशिशों के बावजूद उसे अबतक नहीं ढूँढा जा सका. इसके लिए जेनेयू में आंदोलन भी हुआ.

लेकिन नजीब गायब है और पुलिस तलाश करने में नाकाम है तो इसमें मोदी सरकार क्या करे? देशभर में हर दिन कितने बच्चे और लोग गायब हो जाते हैं.उनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं होता. नजीब की तलाश तो कम-से-कम पुलिस कर ही रही है. सरकार इसमें क्या करे? सारे काम-धाम खोजकर नक्सली मीडिया,नेता और कन्हैया जैसों को खुश करने के लिए दिन-रात खोजता फिरे.फिर पुलिस और प्रशासन का क्या काम?

लेकिन कन्हैया जैसे लोग समझकर भी अनजान बनते हैं और जानबूझकर सुलगाने वाले बयान देते हैं. कन्हैया ने ऐसा ही एक बयान अपनी किताब ‘बिहार से तिहाड़’ के लॉन्च के मौके पर देते हुए कहा कि जेएनयू से 3000 कन्डोम ढ़ूढ़कर निकाल लेने वाली सरकार नजीब को नहीं ढ़ूढ़ पा रहे हैं.जेएनयू के छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए गए कन्डोम ढ़ूढ़ निकालना अपने आप में एक हुनर है, लेकिन इस हुनर का सही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. नजीब को ढ़ूढ़ने में इस हुनर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

अब इस तुलना को बेसिर-पैर का माना जाए या नहीं? वैसे कौन कन्हैया को समझाए कि पुराने कंडोम की तलाश व्यर्थ है,वे किसी काम के नहीं होते. फिर भी राजनीतिक क्षितिज की तलाश में पुराने कंडोम की तलाश में लगा है कन्हैया और इस महत्वकांक्षा में ये भी भूल गया कि पिता को गुजरे अभी कुछ वक्त ही गुजरा है, कंडोम को लेकर कुछ दिन तक सब्र रखो. परंपरा भी तो कोई चीज होती है कॉमरेड! नजीब के बहाने कंडोम तो बीच में मत लाओ. हम उसके सही सलामत मिलने  की दुआ करते हैं, आमीन.

ज़मीन से ज़मीन की बात – भू-मंत्र