आरक्षण का मुद्दा देश में नए सिरे से गरमाता जा रहा है. इन सबके बीच पिछड़े व गरीब सवर्णों को भी आरक्षण दिए जाने का मुद्दा लगातार गरमा रहा है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ.सीपी ठाकुर इस मुद्दे पर काफी मुखरता से बोल रहे हैं. उनका कहना है कि गरीब सवर्णों को भी आरक्षण मिलना चाहिए, नहीं तो देश में हालात विस्फोटक हो जायेंगे. पेश है एनबीटी को दिए उनके इंटरव्यू के ख़ास अंश –

cp thakur on reservation
आरक्षण पर डॉ.सीपी ठाकुर 

आरक्षण पर आपका स्टैंड? 
मैं आरक्षण के खिलाफ नहीं हूं। आरक्षण होना चाहिए। एससी समुदाय के उत्थान की जरूरत है, लेकिन मेरा स्पष्ट मत है कि अब वक्त आ गया है कि सवर्णों में जो गरीब तबके के लोग हैं, उन्हें भी आरक्षण मिलना चाहिए। उनकी हालत बहुत खराब है। अगर केंद्र सरकार ने उनके लिए तत्काल कोई कदम नहीं उठाया, तो देश में नई समस्या खड़ी हो सकती है। 
किस समस्या का आपको डर है? 
समाज में अशांति फैल जाएगी। गुजरात में पटेल आंदोलन जो हुआ, उसकी पुनरावृत्ति हो जाएगी। हालात बेकाबू हो सकते हैं। पटेल आंदोलन चेतावनी है। उसका राजनीतिक नुकसान भी हमारी पार्टी को झेलना पड़ा है। अब वक्त की मांग है कि आरक्षण के सिस्टम पर समीक्षा हो। जाति से हटकर कुछ ऐसा सोचने की जरूरत है, जिससे सबका लाभ हो। दलित, ओबीसी को आरक्षण मिल रहा है, तो पिछड़े भूमिहार-ब्राह्मणों को भी आरक्षण मिले, जिन्हें संसाधन की जरूरत है। 
निजी कंपनियों में आरक्षण? 
निजी कंपनियों में अगर आरक्षण दे दिया, तो बेड़ा गर्क हो जाएगा। सब कुछ तबाह हो जाएगा। मैं इस मांग या पहल के सख्त खिलाफ हूं। मेरी अपील है कि राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के खतरनाक प्रयोग को न करें। हर जगह जातिवाद या आरक्षण के सहारे हम विकास को नहीं पा सकते हैं। अगर निजी कंपनियों में भी आरक्षण दे दिया, तो उस दिन देश पीछे की ओर मुड़ जाएगा। 
आपने अपना स्टैंड पार्टी को बताया? 
मैं अपने स्तर पर इस मुद्दे पर लगातार राय दे रहा हूं। हां, अगर जरूरत महसूस हुई, तो पार्टी फोरम पर इस बारे में अपनी राय मजबूती से रखने से पीछे नहीं हटूंगा। मेरा तो मत है कि बाकी सभी दलों के नेताओं को आरक्षण के मुद्दे पर बात करने के लिए आगे आना चाहिए। मैं बार-बार कह रहा हूं कि आरक्षण वाजिब को मिले और किसी का हक न कटे। और इस बात पर कहीं भी बोलने को तैयार हूं। 
और कौन दूसरी बड़ी समस्या? 
मेरे हिसाब से आरक्षण के बाद अभी किसानों की समस्या भी बेहद गंभीर है। हमारी सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। अरहर दाल पर किसानों को पहले 160 रुपये कीमत मिलती थी, अभी 80 रुपये मिल रही है। यही हाल मसूर या खेसारी दाल को लेकर है। मैं खुद किसान हूं और जानता हूं कि कितनी परेशानी आ रही है। इन्हें तत्काल बड़ी मदद की जरूरत है, नहीं तो वर्ष 2019 में किसानों की दशा हमारी पार्टी के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। 
केंद्र ने किसानों के लिए काम नहीं किया? 
मैं यह नहीं कहूंगा कि बेहतर काम नहीं किया, बल्कि यह कहूंगा कि अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है और तत्काल। सिंचाई, खाद से लेकर बहुत कुछ क्रांतिकारी कदम उठाने होंगे, नहीं तो देर हो जाएगी। 
2019 में ये मुद्दे गौण हो जाएंगे? 
बिल्कुल नहीं! कोई ऐसा सोच रहा है, तो वह गलतफहमी में है। साल 2019 का चुनाव परिणाम किसान को कितना दाम मिला और युवाओं को कितना काम मिला, इससे ही तय होने वाला है। 
बिहार में शराबबंदी और दहेज विरोधी अभियान 
बिहार में शराबबंदी कभी बंद नहीं हो पाएगी। नारंगी के ट्रक में खुलेआम शराब आ रही है। दहेज भी छुपकर लिए जा रहे हैं। यह सब सामाजिक कुरीति है, जो एक दिन में नहीं जाती है। नीतीश कुमार ने गलत प्राथमिकता तय कर ली है। इसपर जरूर ध्यान दें, लेकिन सिर्फ इसे ही प्राथमिकता न बनाएं। पता नहीं किन कारणों से वह इसे ही प्राथमिकता दे रहे हैं। नतीजन लॉ ऐंड ऑर्डर, स्कूल, हॉस्पिटल आदि के काम बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। नीतीश को उन क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत है। (एनबीटी से साभार)

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