नीतिश कुमार ने राजनैतिक ड्रामे के तहत जब जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया तो उन्हें सपने में भी गुमान नहीं था कि वे उनके साथ दगाबाजी करेंगे और उनके खिलाफ ही मोर्चा खोल देंगे.लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही नीतिश कुमार की जगह लेने के चक्कर में जीतन राम मांझी ने जमकर दलित कार्ड खेला और सवर्णों को गरियाने का कोई मौक़ा नहीं चूके.यहाँ तक कि ऐसी-ऐसी अनाप-शनाप बाते भी कही जिसके लिए वे हंसी के पात्र भी बने.इसी कड़ी में जीतन राम मांझी ने सवर्णों को विदेशी तक कह डाला था.
नवंबर 2014 में पश्चिम चंपारण में एक सभा को संबोधित करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा था कि सवर्ण जाति के लोग विदेशी हैं. भारत के मूल निवासी आदिवासी, अनुसूचित जनजाति और गरीब लोग हैं.
मजेदार देखिये कि पथरा इंग्लिश के विदेशी भूमिहारों के लिए अब ये देशी जीतन राम मांझी आवाज़ बुलंद करेंगे. सुनिए उनका पुराना बयान और पथरा इंग्लिश मामले में एक राजनैतिक महत्वाकांक्षा वाले भू-संगठन का मांझी से गठबंधन का आंकलन कीजिये.वैसे भू मंत्र का मानना है कि मांझी जैसों को समर्थन देना और लेना दोनों सांप को दूध पिलाने जैसा है.
कैसे भूल गए सवर्णों को लेकर दिए मांझी के बयानों को.बड़ी कमजोर है आपकी यादाश्त जनाब.जो नीतिश का ना हुआ, वो आपका क्या होगा? भूमिहारों के मर्म को छूकर वोट हथियाने और कुछ लोगों को अपनी नेतागिरी चमकाने की एक कवायद भर है. पथरा इंग्लिश मामले में इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.




राजनीति में सारे ही नेता एक ही बोली बोलते हैं,जब फायदा तो कुछ और,फायदा न तो कुछ और।
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