उत्तरप्रदेश में चुनावी घमासान थम चुका है.अब चुनाव परिणामों का इंतजार है. 11मार्च को ये इंतजार भी ख़त्म हो जाएगा. लेकिन कई प्रत्याशी ऐसे भी हैं जो चुनाव परिणाम आने से पहले ही जीत चुके हैं.ऐसी ही एक प्रत्याशी हैं मोहम्मदाबाद से अलका राय. वे स्वर्गीय कृष्णानंद राय की पत्नी हैं. उनकी हत्या राजनीतिक रंजिश की वजह से की गयी थी और उसके आरोप में बाहुबली मुख्तार अंसारी अब भी सलाख़ों के पीछे है.मोहम्मदाबाद से मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिग्ब्तुल्लाह अंसारी चुनाव मैदान में थे. लेकिन जब अलका राय को भाजपा ने टिकट दिया तो उन्होंने न केवल इसे स्वीकार किया, बल्कि एक तरह से अपनी जान दांव पर लगाकर चुनाव भी लड़ा. ये लड़ाई उन लोगों के खिलाफ थी जो राजनीतिक रंजिश में ह्त्या करवाने से भी नहीं चूकते.लेकिन अलका राय डरी नहीं और इसलिए सही मायनों में वही विजेता हैं.क्योंकि हार और जीत से बड़ी होती है हिम्मत। इसलिए चुनाव परिणाम कुछ भी हो,अलका राय विजेता है और इसके लिए उन्हें किसी चुनाव आयोग के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं.क्योंकि जनता उन्हें सर्टिफिकेट दे चुकी.ऐसी नारी शक्ति को सलाम.

ज़मीन से ज़मीन की बात 

 www.bhumantra.com