अखंड प्रताप राय,रिसर्च स्कॉलर-
सही मायनों में इस दुनिया में कोई भी षड्यंत्र जातिय धार्मिक क्षेत्रीय भाषाई या भौगोलिक नहीं है.दुनिया के सारे षड्यंत्र आकृति के आधार पर है.मोटे और पतले लोगों के संघर्ष को ही बस अलग-अलग नामों में बांट कर पतले लोगों ने मोटे लोगों को गुमराह किया है. आज मोटे लोग पृथ्वी के हर कोने में सफलता प्राप्त कर रहे हैं जैसे कि अपना ट्रंप चचवा जिसका विरोध दुबले ओबामा ने किया. शरद पवार से भी बड़ा घोटाला मधु कोड़ा और ए रजा ने किया मगर मोटे लोगों से पूर्वाग्रह के चलते ज्यादा बदनाम पवार को किया गया. पांच साल सत्ता में रहकर सारी अव्यवस्था अखिलेश ने फैलाई मगर खामियाजा मायावती को उठाना पड़ा. अमित शाह से ज्यादा कट्टरपंथी ओवैसी है मगर एक मात्र मोटा होने की वजह से अमित शाह को ज्यादे बदनाम किया गया है. गोरखपुर के योगी और तिवारी के बीच भी दुश्मनी का मूल कारण तिवारी जी का मोटा होना ही है. ये तो राजनैतिक उदाहरण है.
समाज में कहावतों के माध्यम से भी मोटे लोगों को बदनाम किया गया है और ये भ्रम फैलाया गया है कि ” मोटापा रोगो का घर होता है ” जबकि किसी भी अस्पताल में जा के देखिए तो आप पाएंगे की नब्बे प्रतिशत मरीज दुबले लोग ही होते हैं. मोटे पुलिस वालों का भी मजाक उड़ाया जाता है जबकि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में मोटे पुलिस वालों की तुलना में पतले पुलिस ज्यादे होते हैं.
दरअसल , मोटे लोगों में जीवन के उत्साह उमंग और तरंगो को देखकर दुनिया भर के पतले लोगों ने तमाम तरह के षड्यंत्र किये है जिसमें उन्होंने इंसान तो इंसान , जानवरों के साथ भी भेदभाव किया है. अब हाथी से ज्यादा ताकतवर भला कौन है फिर भी शक्ति का मानक ” हार्स पावर ” है मतलब दुबले घोड़े को शक्तिशाली माना गया है मोटे हाथी के साथ नाइंसाफी कर के गेंडे का मजाक उसकी नाक की सींग के वजह से उड़ाने वाले कभी जिराफ का मजाक उसके जरूरत से ज्यादा लंबी गर्दन के लिए नहीं उड़ाते.
अब समय आ गया है कि पतले लोगों के इस षड्यंत्र के खिलाफ दुनिया भर के मोटे लोगों में जागरूकता फैलाई जाए , सार्वाजनिक स्थानों पर पतले लोगों का मजाक उड़ाया जाएं , उनको एहसास दिलाया जाए कि प्रकृति भी मूलत: मोटापे को ही संरक्षित करती है , मोटे पीपल बरगद के पेड़ दिर्घायु होते हैं , सारे फलदार पेड़ मोटे होते हैं , पृथ्वी खुद मोटी है इसलिए जिवन दायनी है वर्ना पतले चांद पर तो हवा भी नहीं है. प्रथम पुज्यनीय गणेश भगवान भी मोटे है और धर्मराज यम भी. दुनिया के मोटे लोगों में गंभीर जागरूकता की जरूरत है. जय मोटा क्रांति.
(लेखक के सोशल मीडिया प्रोफाइल से साभार)
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