लालू यादव को चारा घोटाले के एक मामले में राँची की सीबीआई अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने के उपरांत उनकी पार्टी के नेता द्वारा इस फैसले पर विवादास्पद बयान दिया जाने को समाजद्रष्टा सह स्वतंत्र राजनैतिक विश्लेषक एवं ब्रम्हर्षि चिंतक ” राजीव कुमार ” एक नफरत फ़ैलाने वाला प्रायोजित कदम मान रहे हैं एवं इसकी तीव्र भर्त्सना कर रहे हैं तथा इसपर त्वरित संज्ञान लेने की आवश्यकता पर भी बल दे रहे हैं । एक त्वरित विश्लेषण –
लालू यादव को हुई सजा का दुष्प्रचार क्यों ?
लालू यादव को राँची की सीबीआई अदालत द्वारा चारा घोटाले के एक मामले में दोषी करार दिये जाने के पश्चात् उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा न्यायालय के आदेश पर विवादास्पद टिप्पणियाँ दी गई और न्यायालय के उक्त आदेश को एक अलग कोण देकर उसके माध्यम से देश और समाज में नफरत फ़ैलाने का प्रयास किया गया है जो कि सरासर गलत कदम है और इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए उतनी कम है । इस तरह की टिप्पणियाँ कहीं से और किसी भी दृष्टि से अच्छी नहीं कही जा सकती बल्कि इनको नफरत फ़ैलाने वाला एक प्रायोजित कदम मानकर उसपर त्वरित संज्ञान लिया जाना चाहिए ताकि आगे से ऐसी नफरत फ़ैलाने वाली विवादस्पद टिपण्णी करने की किसी राजनेता की हिम्मत न हो और लोग कानून का भद्र भाषा में सम्मान करना सीखें ।
ज्ञात रहे कि राँची की सीबीआई अदालत द्वारा चारा घोटाले के एक मामले में लालू यादव के अलावा पूर्व सांसद श्री जगदीश शर्मा समेत अन्य लोगों को भी दोषी करार दिया गया है लेकिन लालू यादव को दोषी करार दिए जाने के उपरांत उनकी पार्टी के नेता ने खुलेआम मीडिया के समक्ष लालू यादव को दोषी करार दिए जाने और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र को निर्दोष करार दिए जाने को लेकर मीडिया के समक्ष गंभीर और विवादस्पद टिपण्णी कर दी जो किसी भी स्तर से न तो शोभनीय और न ही क्षम्य कहा जा सकता है बल्कि एक प्रायोजित विवादस्पद टिपण्णी कहा जा सकता है जिसपर त्वरित संज्ञान लेने की जरूरत है ताकि इस प्रकार की नफरत फ़ैलाने वाली हरकत आगे से कोई भी नेता करने की हिम्मत नहीं कर सके और कानून का उचित सम्मान मर्यादित भाषा में करना जान सकें । इस तरह की नफरत फ़ैलाने वाली विध्वंशक टीका टिप्पणियाँ समाज को तोड़ने का काम करती हैं जो बिलकुल अक्षम्य हैं और अपराध की श्रेणी में आती हैं । इसपर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है ।




