लालू यादव को राजगीर में राजद के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान न जाने किस प्रशिक्षक से दिव्यज्ञान मिला कि वे अचानक तंद्रा से जागे और शंकराचार्य के पद के लिए भी आरक्षण की मांग कर डाली. लालू यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा – ” चारों पीठ में शंकराचार्य की नियुक्ति मे भी आरक्षण होना चाहिए।युगो-युगों से वहाँ सिर्फ़ एक वर्ण और एक ही जात का आरक्षण क्यों है।सोचिए?”
लालू यादव के इस बयान के बाद चारो तरफ इसकी निंदा हो रही है. खुद उनके स्वजातीय भी उनके इस बयान का विरोध कर रहे हैं. इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्री और नवादा के सांसद गिरिराज सिंह का भी बयान आया है. उन्होंने लालू को मसखरेबाज की संज्ञा देते हुए कहा कि लालू जी बहुत बड़े मसखरेबाज हैं. उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में गरीबों के लिए कोई भी कार्य नहीं किया और न ही गरीबों का कभी भी उत्थान किया. लालू ने अपना पूरा राजनीतिक जीवन सिर्फ और सिर्फ भावना भड़काने का कार्य किया. उन्होंने कहा कि देश के शंकराचार्यों को आरक्षण देने की बात करने वाले लालू अब हिंदू धर्म में शंकराचार्य को भी बांटने का कार्य कर रहे हैं. अगर उनमें हिम्मत है तो वो मुस्लिमों के तीन तलाक पर आवाज उठा कर भी दिखाएं. लालू को मुस्लिमों के धर्म गुरू पर बोलने की हिम्मत है ही नहीं और वो सिर्फ नौटंकी मात्र करते हैं.

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