मामला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के लापता छात्र नजीब अहमद से संबंधित था. आप जैसा कि जानते ही हैं कि जेएनयू का ये छात्र अचानक गायब हो गया और पुलिस/प्रशासन की कोशिशों के बावजूद उसे अबतक नहीं ढूँढा जा सका. इसके लिए जेनेयू में आंदोलन भी हुआ.
लेकिन नजीब गायब है और पुलिस तलाश करने में नाकाम है तो इसमें मोदी सरकार क्या करे? देशभर में हर दिन कितने बच्चे और लोग गायब हो जाते हैं.उनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं होता. नजीब की तलाश तो कम-से-कम पुलिस कर ही रही है. सरकार इसमें क्या करे? सारे काम-धाम खोजकर नक्सली मीडिया,नेता और कन्हैया जैसों को खुश करने के लिए दिन-रात खोजता फिरे.फिर पुलिस और प्रशासन का क्या काम?
अब इस तुलना को बेसिर-पैर का माना जाए या नहीं? वैसे कौन कन्हैया को समझाए कि पुराने कंडोम की तलाश व्यर्थ है,वे किसी काम के नहीं होते. फिर भी राजनीतिक क्षितिज की तलाश में पुराने कंडोम की तलाश में लगा है कन्हैया और इस महत्वकांक्षा में ये भी भूल गया कि पिता को गुजरे अभी कुछ वक्त ही गुजरा है, कंडोम को लेकर कुछ दिन तक सब्र रखो. परंपरा भी तो कोई चीज होती है कॉमरेड! नजीब के बहाने कंडोम तो बीच में मत लाओ. हम उसके सही सलामत मिलने की दुआ करते हैं, आमीन.



