manoj sinha
केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा अमूमन विवादों से दूर ही रहते हैं. वे अपनी संयत भाषा के लिए जाने जाते हैं. लेकिन उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम जबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उछला तब से उन्हें विवादों में उलझाने की लगातार कोशिश की जा रही है. उसी कड़ी में ताजा विवाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में दिए गए उनके व्याख्यान को लेकर है.
दरअसल मामला 28 जून का है जब काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था जिसमें दो डाक टिकट जारी हुए. इसमे रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने भी शिरकत की थी और उन्होंने सामान्य बातचीत में प्रख्यात साहित्यकार धर्मवीर भारती की रचना का जिक्र करते हुए इलाहाबाद को ‘हरामजादा’ शहर बताया था. उनकी इस टिप्पणी के बाद मामला गरमा गया है और साहित्यकार धर्मवीर भारती की पत्नी पुष्पाभारती ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. 
पुष्पाभारती ने कहा, ‘भारती जी न तो इस तरह की भाषा बोलते थे, न लिखते थे और न ही उनकी रचना का कोई पात्र ऐसी भाषा बोलता है.’ उन्होंने कहा कि जिनकी रगों में इलाहाबाद बहता हो, वह भला ऐसा कैसे कह सकते हैं.इस संबंध में केंद्रीय मंत्री पर बनारस की अदालत में परिवाद दर्ज कराया गया है. कोर्ट ने इस मामले में परिवाद दर्ज करते हुए परिवादी प्रेम प्रकाश यादव एडवोकेट के बयान के लिए 13 जुलाई की तिथि नियत की है. 
बहरहाल बयान पर विवाद होते देख केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया के जरिए स्पष्टीकरण दिया और लिखा कि, “दिनांक 28 जून 2017 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में दो स्मारक डाक टिकट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय पर जारी किये गये। उस कार्यक्रम में मेरे द्वारा धर्मवीर भारती जी के प्रसंग के उद्धृत करने को लेकर एक गैर जरुरी विवाद पैदा हुआ है, उसका सन्दर्भ हास-परिहास का था।यह मेरे और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गिरीश चन्द्र त्रिपाठी जी के व्यक्तिगत सम्बन्धों में चला आ रहा है। इलाहाबाद शहर हमारे लिए श्रद्धा का केंद्र है जिसे तीर्थराज हम मानते हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय जिसे ऑक्सफ़ोर्ड के नाम से देश जानता है, इस विश्वविद्यालय के लिए मेरे मन में अत्यंत सम्मान है इलाहाबाद शहर और विश्वविद्यालय के लिए कोई अपमान जनक टिप्पणी करने की बात तो दूर , मैं स्वप्न में भी नहीं सोच सकता हूँ।धर्मवीर भारती जी हिंदी साहित्य के अत्यंत तेजश्वी नक्षत्र रहे हैं और उनके लिए भी मेरे मन में अत्यंत श्रद्धा है। उनके पुरे साहित्य को समझना मेरे लिए बहुत मुश्किल है क्यूंकि न मैं साहित्य का विद्यार्थी रहा हूँ न ही मेरी उतनी समझ है बावजूद इसके अगर किसी की भावना को आघात लगा है तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरी ऐसी कोई मन्सा नहीं थी बावजूद इसके इलाहाबाद व इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रेमियों तथा धर्मवीर भारती जी में आस्था रखने वालों सभी बहनों-भाइयों से मैं खेद प्रकट करता हूँ। मेरा यह भी आग्रह होगा कि हर चीज़ को राजनीति के नजरिये से देखना यह अच्छी परम्परा नहीं है।”

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