योगी आदित्यनाथ आखिरकार उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री घोषित हुए तो राजनीति के अलावा पत्रकारिता जगत से भी कई तरह की पातिक्रियाएं आयी. वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी की दो प्रतिक्रिया –
1-आसमान से गिरे, खजूर में अटके। पहले राजनाथ सिंह का नाम चला। अनुभवी नेता थे। मनोज सिन्हा भी संजीदा शख़्स हैं। पर संघ को कुंडल-कमंडल-तिलक धारी योगी आदित्यनाथ पसंद हैं – सर से पा तक भगवा। नई भाजपा के सर्वश्रेष्ठ प्रतीक?
2-मनोज सिन्हा में संजीदगी है, उग्रता से परहेज़। पर मुझे अब लगता है कि सब चाल के तहत हुआ है। चुनाव में ही यह तय हो गया होगा। तभी योगी के बाग़ी तेवर अचानक शांत हुए, उनकी ‘सेना’ के बाग़ी उम्मीदवार खड़े नहीं हुए। उन्होंने प्रचार में भी जान लगा दी। पर उन्हें ही परोसना था तो थाली सिन्हाजी के सामने क्यों रखी?
एक और प्रतिक्रिया –
चंचल : मन उदास हो गया । दिन भर खबर रही उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मनोज सिन्हा हो रहे हैं । हमने लोंगो से कहा कि भाजपा लंबी पारी खेलने का इरादा रख रही है । मनोज सिन्हा सूझबूझ वाले और समझदार लोंगो में गिने जाते हैं । हम लोंगो के बीच मतभेद रहे है पर मनभेद कभी नही रहा । मंच पर हम अलग अलग प्रवचन देते थे लेकिन सड़क पर फिर वही साथ । हम उन्हें मनोज जी और वे हमें अध्यक्ष जी ही बोलते हैं । कल फोन पर बात भी हुयी , हमने बधाई भी दिया । लेकिन भाजपा का दुर्भाग्य है कि वह सही निर्णय से फिर फिसल गई । योगी में दो बड़े गुण है । योगी और ठाकुर ।
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