NOTA की बढ़ती लोकप्रियता और इसकी महत्ता पर प्रकाश डाल रहे हैं ब्रम्हर्षि चिंतक ‘राजीव कुमार’ 

nota in gujrat

-राजीव कुमार- 

गुजरात विधानसभा चुनाव में NOTA को मिले तकरीबन 5.5 लाख वोट से बहुत ही उत्साहित हैं समाजद्रष्टा एवं स्वतंत्र राजनैतिक विश्लेषक राजीव कुमार और इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ और अभूतपूर्व सुधारवाद की ओर बढ़ता कदम मान रहे हैं । पढ़िए उनका पूरा लेख –

गुजरात का ऐतिहासिक चुनाव – 
हाल ही में सम्पन्न गुजरात के विधानसभा के चुनाव ऐतिहासिक रहे हैं । जी हाँ ऐतिहासिक । ऐतिहासिक इस दृष्टिकोण से कि चुनाव के नतीजों के निहितार्थ बहुत ही रोचक और समूचे देश एवं देश के राजनेताओं को एक जबरदस्त सन्देश देने वाले हैं । बात जब नतीजों की करते हैं तो जहां एक ओर सत्ताधारी दल भाजपा को जहां कुल 182 सीटों के लिए हुए चुनाव में 99 सीटें मिली तो देश की दूसरी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को 80 सीटें । जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 115 और कांग्रेस को 61 सीटें मिली थी । इनदोनों चुनाव के नतीजों का जब हम गंभीर विश्लेषण करते हैं तो सबसे रोचक जो पहलू निकलकर सामने आ रहा है वो है दोनों पार्टियों भाजपा और कांग्रेस को मिले वोटों के बीच का अंतर जिसके निहितार्थ बहुत ही अभूतपूर्व और समूचे भारत देश के लोकतंत्र को एक वृहत सन्देश देने वाले प्रतीत होते हैं । 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में जहाँ भाजपा और कांग्रेस को मिले मतों के प्रतिशत के बीच का अंतर 10 प्रतिशत था वहीं 2017 के हालिया संपन्न गुजरात विधानसभा चुनाव में यह अंतर घटकर 7.7 प्रतिशत पर आ गया । यानि 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को मिले वोटों के प्रतिशत का अंतर घटकर 7.7 प्रतिशत पर आ गया जिसकी परिणति चुनाव नतीजों पर कुछ इस प्रकार से परिलक्षित हुई कि जहाँ भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 16 सीटों का नुकसान झेलना पड़ा वहीँ दूसरी ओर कांग्रेस को 19 सीटों का फायदा हुआ । यानि वोटों के प्रतिशत में मात्र 2.3 प्रतिशत के अंतर के आये इस बदलाव का चुनाव के नतीजों पर व्यापक असर पड़ा । 
नोटा का सोंटा – 
अब आइये बात NOTA की करते हैं जिसपर भी लगभग 2% के करीब मत पड़े । NOTA को मिले इस मत की महत्ता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि ये प्रबुद्ध लोगों द्वारा काफी सोंच समझकर एक छुपे हुए सन्देश के साथ दिए गए मत थे । NOTA को दिए गए इन मतों का सन्देश साफ था कि ये प्रबुद्ध लोग जहाँ एक तरफ भाजपा की डपोरशंखी विकास के वादे और जुमले से नाराज थे वहीँ दूसरी ओर कांग्रेस की जातिवादी आरक्षण वाले मुद्दे को लेकर कांग्रेस से भीे इत्तेफाक नहीं रखते थे और उनसे भी नाराज थे । कुलमिलाकर उक्त दोनों ही राजनीतिक दलों से इन प्रबुद्ध लोगों की नाराजगी की परिणति NOTA को मिले मतों के रूप में हुई जिसने नतीजों में भारी उथल पुथल किया क्योंकि यदि NOTA को मिले मतों को भाजपा में जोड़ देंगे तो परिणाम संभवतः ये होते कि भाजपा को 114 सीटें मिलती और कांग्रेस को 65 । जबकि इसके ठीक उलट यदि NOTA को मिले वोटों को कांग्रेस में जोड़ देते हैं तो चुनाव परिणाम कुछ इस प्रकार के होते कि कांग्रेस को जहां 95 सीटें मिलती वहीँ भाजपा को 84 सीटों से संतोष करना पड़ता यानि की कांग्रेस को बहुमत मिल जाता । 
गुजरात चुनाव परिणाम का संदेश – 
कुलमिलाकर गंभीरतापूर्वक आंकलन करने पर गुजरात विधानसभा के ये नतीजे काफी रोचक और प्रभावशाली हैं जो शायद देश की दोनों ही पार्टियों को ये सोंचने पर मजबूर करेंगी कि जहाँ देश में अब जात पात और आरक्षण की राजनीति नहीं चलेगी वहीँ दूसरी तरफ झूठे विकासवाद की राजनीति भी नहीं चलने वाली है । अब देश की जनता सचमुच के विकासवाद और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की पक्षधर है जहाँ युवाओं को रोजगार मिले और किसानों को खुशहाली और समृद्धि । क्योंकि कांग्रेस को मिले अधिक वोटों में किसानों के लिए किये गए उनके कर्जमाफी के वायदे का ही असर है क्योंकि किसान त्राहिमाम कर रहा है । उपरोक्त सभी तथ्यों का सार यही है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों ने देश के लोकतंत्र को एक जबरदस्त सन्देश देने का काम किया है और यह भारतीय लोकतंत्र को मजबूत और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने हेतु व्यापक चुनाव सुधार की ओर बढ़ने का सन्देश देने वाला चुनाव भी रहा है जिसने लोकतंत्र की मर्यादा का अद्भुत प्रतिमान स्थापित किया है ।

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