कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना , मायावती के निशाने पर भूमिहार , उत्तरप्रदेश के भूमिहार कर ले नोटिस

आम बोलचाल की भाषा में ये मुहावरा बहुत प्रचलित है कि कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना. राजनेता इसका बखूबी इस्तेमाल करते हैं. कुछ महीनों पहले बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इसकी मिसाल पेश की जब जेएनयू छात्र संघ के विवादित अध्यक्ष (उस वक्त) कन्हैया कुमार के बहाने उन्होंने भूमिहारों पर निशाना साधा. दरअसल कन्हैया जब दलित,गरीब-गुरबों की राजनीति करने लग गए और चैनलों ने भी कन्हैया को दलितों का मसीहा साबित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी तो मायावती जैसी कद्दावर नेताओं को भी अपने दलित वोटों में सेंधमारी का खतरा सताने लगा. बस ये बताने के लिए मायावती ने बयान जारी करते हुए कहा –

“कन्हैया कुमार दलित नहीं है।वह बिहार के भूमिहार बिरादरी का है। वह वामपंथी दलों का मोहरा है। वह केवल दलितों को गुमराह करने के लिए डॉ अंबेडकर के गरीबी हटाओ कार्यक्रम की बात कर रहा है, जिसे भाजपा तूल देकर केवल डॉ अंबेडकर के मूवमेंट दलित उत्थान को कमजोर करना चाहती है। ” 

दरअसल मायावती का ये बयान एक तरह से भूमिहारों के प्रति उनकी घटिया सोंच को दर्शाता है. वे चाहती तो सीधे-सीधे कन्हैया पर बयान जारी कर सकती थी. पर उनकी मंशा कन्हैया के बहाने भूमिहारों को भी निशाने पर लेना था ताकि नफरत फैलाकर कुछ दलित वोटों की कमाई की जा सके. वैसे दलितों के लिए मायावती ने अबतक क्या किया है, किसी से छिपा है क्या? 

दलितों की राजनीति करने से दलितों का भला नहीं होता बहन मायावती और भूमिहारों पर आपकी ये टिप्पणी आपकी कुत्सित सोंच को दर्शाता है. उत्तरप्रदेश के भूमिहार आपने नोटिस किया या नहीं?