Bhumihar Politics

-भूमंत्र डेस्क 

चुनाव संपन्न होने के पश्चात नतीजों के साथ साथ पूर्व चुनाव के नतीजों को ले कर एक चर्चा होनी चाहिए कि भूमिहार एकता का जयघोष सिर्फ नारा मात्र है या कुछ लोग सचमुच गंभीर हैं.

चुनावों को ले कर अपने समाज के अन्दर एक आम सहमती होनी चाहिए थी. और आम सहमती बनता है विमर्श से. एक बात रखा जाता है और उसके गुण – दोष पर चर्चा होता है, तथ्य सामने लाये जाते हैं. लेकिन अनुभव यही हुआ है कि लोगों को चर्चा में रूचि कम है, तथ्य सामने लाने में रुची कम है, उनकी रूचि अपना “फरमान” सुनाने में ज़्यादा है. फरमान के उलट कोई कुछ बोले तो वो “दलाल”, “एजेंट”, “देशद्रोही” और न जाने क्या क्या हो जाता है. भाई ज़मींदारी जा चुकी, अब सुनना सीख लें, चर्चा करना सीख लें.

राजपूत जैसे वर्ग आपका अस्तित्व मिटाने में लगे हुए हैं, और आप अपने समाज के लोगों को गाली देने में अपना शौर्य देख रहे हैं. जहां जहां राजपूत कब्जा कर रहा है, आपके लिए संभावनाओं के दरवाज़े बंद कर रहा है, जहां आप शक्तिशाली दिखने लगते हैं वो आपको मिटाने के उपाय करने लगता है, और इस काम में वो सक्रियता से लगा हुआ है. कल ही एक प्रवीण सिंह का फोटो पोस्ट किया था, देखिये उसके प्रोफाइल को, कितने सरकारी महकमों में घुसा हुआ है. आप कहाँ हैं? सवर्ण आन्दोलन के नाम पर आपसे सरकार के खिलाफ झंडा उठवा देता है और लाठी से पीटवा देता है और खुद सरकार के साथ सत्ता का सुख लेता रहता है.

मैं ये नहीं कह रहा कि राजपूत से लड़ लीजिये. आँखें खोलिए. पूरी चेतना के साथ कुछ करिए. जब अपना हक़ मांगना चाहिए, जैसे चुनाव के समय तो हक़ मांगिये, चूकिए मत. दुसरे की लड़ाई में चौधरी बनने से परहेज़ करिए. पुरे सवर्ण समाज की ठेकेदारी अकेले मत लीजिये, किसी और को आगे बढ़ने दीजिये. आम सहमती बनाने का अभ्यास करिए. वरना भविष्य अंधकारमय है, हर कोई दबा देगा.

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